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Prayagraj News: परिवार न्यायालयों में काउंसलर्स की नियुक्ति पर रोक
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के परिवार न्यायालयों में काउंसलर्स की नियुक्ति के लिए 14 सितंबर को जारी विज्ञापन के तहत नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि 19 मार्च 2026 के हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में काउंसलर्स की नियुक्ति के लिए नियमावली तैयार की गई है या नहीं। यदि नियमावली नहीं बनी है तो मौजूदा विज्ञापन के आधार पर नियुक्तियां नहीं की जाएंगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने वीरेंद्र सिंह व तीन अन्य की याचिका पर दिया।
याचिका में कहा गया कि याची 2020 में इलाहाबाद और कानपुर के परिवार न्यायालयों में काउंसलर के पद पर एडहॉक नियुक्त हुए थे। उन्होंने निर्धारित प्रशिक्षण भी लिया और तीन वर्ष बाद उनका कार्यकाल तीन वर्ष के लिए बढ़ाया गया। अब 14 सितंबर के विज्ञापन के जरिये नई एडहॉक नियुक्तियां की जा रही हैं।
याची के अधिवक्ता ने कहा कि एक एडहॉक नियुक्ति को दूसरी एडहॉक नियुक्ति से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार से यह भी बताने को कहा है कि काउंसलर्स की संख्या में कितनी वृद्धि की गई है। साथ ही याचिका लंबित रहने तक न्यायिक कार्य प्रभावित न हो। इसलिए याचियों को काम करने देने का आदेश दिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने वीरेंद्र सिंह व तीन अन्य की याचिका पर दिया।
याचिका में कहा गया कि याची 2020 में इलाहाबाद और कानपुर के परिवार न्यायालयों में काउंसलर के पद पर एडहॉक नियुक्त हुए थे। उन्होंने निर्धारित प्रशिक्षण भी लिया और तीन वर्ष बाद उनका कार्यकाल तीन वर्ष के लिए बढ़ाया गया। अब 14 सितंबर के विज्ञापन के जरिये नई एडहॉक नियुक्तियां की जा रही हैं।
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याची के अधिवक्ता ने कहा कि एक एडहॉक नियुक्ति को दूसरी एडहॉक नियुक्ति से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार से यह भी बताने को कहा है कि काउंसलर्स की संख्या में कितनी वृद्धि की गई है। साथ ही याचिका लंबित रहने तक न्यायिक कार्य प्रभावित न हो। इसलिए याचियों को काम करने देने का आदेश दिया है।
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