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एसएस खन्ना में कार्यक्रम: न्याय के केंद्र में होनी चाहिए मानवीयता
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SS Khanna college
- फोटो : CITY DESK
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प्रयागराज। एसएस खन्ना महिला महाविद्यालय में शनिवार को पांच वषीर्य बीएएलएलबी इंटिग्रेटेड पाठ्यक्रम सत्र 2019-20 का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति एपी साही ने कहा कि मानवीयता न्याय के केंद्र में होनी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधि के ज्ञान का प्रयोग स्वयं के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों, मानवीयता को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। विधि की छात्राओं का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, ‘लगाना है तो बाग लगाओ, आग लगाना मत सीखे।’ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने ‘महिला और विधिक क्षेत्र में संभावनाएं’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कानूनी शिक्षा के लिए अब समान अवसर उपलब्ध हैं। महिलाएं न्यायिक क्षेत्र के साथ सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, राजनैतिक क्षेत्र में भी सक्रियता से कार्य कर रही हैं।
दीक्षा भाषण में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने कहा कि हमो वेद, शास्त्र विधि ज्ञान के भंडार हैं। न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने अतिथियों का स्वागत किया। इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. लालिमा सिंह, डॉ. आशा सेठ, डॉ. अल्पना अग्रवाल ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न भेंट किए। डॉ. प्रियंका मलिक के निर्देशन में छात्राओं ने वंदना गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजरी शुक्ला एवं डॉ. ज्योति बैजल ने किया। इस मौके पर विनय मेहरोत्रा, दिलीप मेहरोत्रा, लता मेहरोत्र, चेतन मेहरोत्रा, डॉ. गुंजन शर्मा आदि मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशा ने किया।
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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विधि के ज्ञान का प्रयोग स्वयं के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों, मानवीयता को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। विधि की छात्राओं का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा, ‘लगाना है तो बाग लगाओ, आग लगाना मत सीखे।’ इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने ‘महिला और विधिक क्षेत्र में संभावनाएं’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कानूनी शिक्षा के लिए अब समान अवसर उपलब्ध हैं। महिलाएं न्यायिक क्षेत्र के साथ सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक, राजनैतिक क्षेत्र में भी सक्रियता से कार्य कर रही हैं।
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दीक्षा भाषण में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने कहा कि हमो वेद, शास्त्र विधि ज्ञान के भंडार हैं। न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने अतिथियों का स्वागत किया। इससे पूर्व प्राचार्य डॉ. लालिमा सिंह, डॉ. आशा सेठ, डॉ. अल्पना अग्रवाल ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न भेंट किए। डॉ. प्रियंका मलिक के निर्देशन में छात्राओं ने वंदना गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजरी शुक्ला एवं डॉ. ज्योति बैजल ने किया। इस मौके पर विनय मेहरोत्रा, दिलीप मेहरोत्रा, लता मेहरोत्र, चेतन मेहरोत्रा, डॉ. गुंजन शर्मा आदि मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशा ने किया।
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