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SRN Hospital : तीनों रेजिडेंट डॉक्टर दस दिन के लिए निलंबित, प्राचार्य को सौंपी गई तीनों की जाच रिपोर्ट

Sat, 07 Sep 2024 01:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Sep 2024 01:32 PM IST
सार

जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिखित जवाब में भी तीमारदारों की ओर से पहले मारपीट की शुरुआत करने की बात कही गई थी। डॉ.दिलीप चौरसिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मरीजों के तीमारदारों से पहले या फिर बाद में मारपीट करना गलत है। बदसलूकी करने वाले तीमारदारों को पुलिस के हवाले भी किया जा सकता था।

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SRN Hospital: All three resident doctors suspended for ten days, investigation report of all three submitted
एसआरएन अस्पताल में मारपीट का वीडियो। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बांदा के तीमारदारों से मारपीट मामले में मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने तीनों आरोपी रेजिडेंट डॉक्टराें के खिलाफ जांच रिपोर्ट प्राचार्य डॉ.वत्सला मिश्रा को सौंप दी है। इसमें प्रॉक्टर डॉ.दिलीप चौरसिया ने तीनों को अनुशासनहीनता का दोषी पाया है। इसके लिए इन्हें तत्काल प्रभाव से 10 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है।

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ऐसे में अब यह तीनों चिकित्सा सबंधित किसी प्रकार का कार्य दस दिन तक नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा इनको प्रिंसिपल कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। बृहस्पतिवार को तीनों जूनियर रेजिडेंट डॉक्टराें ने अपना लिखित बयान प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सौंप दिया था। वहीं, स्वरूप रानी अस्पताल के वार्ड 12 में मौजूद वार्ड बॉय और नर्स का भी बयान दर्ज किया गया था। इसमें पाया गया था कि मारपीट की शुरुआत पहले तीमारदारों ने की थी। इसके अलावा महिला रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ तीमारदारों ने बदसलूकी भी की थी।
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वहीं, जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के लिखित जवाब में भी तीमारदारों की ओर से पहले मारपीट की शुरुआत करने की बात कही गई थी। डॉ.दिलीप चौरसिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मरीजों के तीमारदारों से पहले या फिर बाद में मारपीट करना गलत है। बदसलूकी करने वाले तीमारदारों को पुलिस के हवाले भी किया जा सकता था।
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जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए था। इस प्रकार का कृत्य अनुशासनहीनता को दर्शाता है। इसके लिए तीनों जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को सजा के तौर पर 10 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया।


तीमारदारों के साथ मारपीट करना ही गलत है। यह अनुशासनहीता को दर्शाता है। अगर कोई तीमारदार या फिर मरीज बदसलूकी और मारपीट करने की हरकत करता है तो उसे पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए। इन तीनों डॉक्टरों को दस दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है। - डॉ. दिलीप चौरसिया, प्रॉक्टर, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

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