आखिरी सोमवार पर छलका आस्था -भक्ति और विश्वास का संगम
सावन के पांचवें और आखिरी सोमवार पर संगम से लेकर शहर के शिवालयों तक देवाधिदेव महादेव की महिमा का बखान किया गया। त्रिवेणी संगम पर पुण्य की डुबकी केसाथ ही रेती पर कोरोना से मुक्ति और विश्व शांति के लिए अनुष्ठान किए गए। तटों पर दीपदान के साथ ही अन्न, वस्त्र दान की होड़ मची रही।
उधर, शिवालयों में पूजन, जलाभिषेक और आरती कर भक्तों ने बाबा से लोक मंगल की कामना की। कोरोना संक्रमण की वजह से पुलिस ने संगम जाने वाले मार्गों पर सुबह ही बैरिकेडिंग कर दी। बावजूद इसके बड़ी संख्या में लोग त्रिवेणी केतट पर पहुंचे और आखिरी सोमवार पर पुण्य की डुबकी लगाई। महिलाएं स्नान के साथ ही जगह-जगह हल्दी-चंदन केटीके लगाकर अर्घ्य देती रहीं। कोई रेती पर शिव की प्रतिमाएं बना रहा था , तो कोई रामलला के निर्विघ्न भूमि पूजन के लिए अनुष्ठान कर रहा था।
दशाश्वमेध घाट पर सुबह से ही स्नानार्थियों की भीड़ लगने लगी, लेकिन एसडीआरएफ और पुलिस केजवान दूरी बनाकर लोगों को पूजा-अनुष्ठान की सलाह देते रहे। सरस्वती घाट पर भी डुबकी लगती रही। यहां यमुना तट पर स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर में सुबह सात बजे से ही भक्तों की भीड़ लग गई। भीड़ को देखते हुए पुलिस केजवानों ने दूरी बनाकर लाइन लगवा दी।
थर्मल स्क्रीनिंग के बाद बारी-बारी से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश करते रहे। भक्तों ने दूरी बनाकर बाबा का दर्शन पूजन किया। पुजारी श्रीधरानंद ने बताया कि आखिरी सोमवार होने की वजह से श्रद्धालुओं में दिन भर उत्साह बना रहा। इस दिन बाबा का भांग से शृंगार किया गया। इसी तरह दशाश्वमेध घाट स्थित दशाश्वमेधेश्वर महादेव मंदिर में भी दिन भर बेलपत्र, धतूरा,मदार और कनैल के फूलों से बाबा का पूजन-अर्चन होता रहा।
संगम पर तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर सोमवार को श्रद्धालुओं ने स्नान के साथ ही अयोध्या में रामलला के निर्विघ्न भूमि पूजन के लिए अनुष्ठान किए। जगह-जगह अनुष्ठान होते रहे। भक्तों ने संगम की मिट्टी और गंगा जल से अयोध्या में रामलला के जल्द मंदिर निर्माण के लिए पूजा की।