गांधी जयंती पर विशेष : बापू की अनमोल स्मृतियों को आज भी संजोए हुए है इलाहबाद संग्रहालय
इलाहाबाद संग्रहालय में बापू की निशानियों और उनके पत्रों की थाती सहेज कर रखी गई है। बापू जेब घड़ी रखते थे। आखिरी सांस तक उनके पास जो घड़ी थी, वह अब संग्रहालय में है। साथ ही उनका वो प्रिय चरखा भी है, जिस पर वह सूत कातते थे।
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान के संघर्षों से लेकर उनकी अस्थि कलश विसर्जन यात्रा तक की अनमोल निशानियों को संगमनगरी संजोए हुए है। यहां उनकी जेब घड़ी भी है और जिस चरखे पर वो सूत काता करते थे, वह चरखा भी।
दांडी यात्रा के समय बापू के हाथों तैयार किया गया नमक भी आप देख सकते हैं और वह वाहन भी जिस पर बापू के अस्थि कलश को रखकर संगम तक ले जाया गया था। बापू की पुण्यतिथि पर रविवार को उनसे जुड़ी यह धरोहर निशानियां इलाहाबाद संग्रहालय में लोगों के लिए दर्शनीय बनेंगी।
इलाहाबाद संग्रहालय में बापू की निशानियों और उनके पत्रों की थाती सहेज कर रखी गई है। बापू जेब घड़ी रखते थे। आखिरी सांस तक उनके पास जो घड़ी थी, वह अब संग्रहालय में है। साथ ही उनका वो प्रिय चरखा भी है, जिस पर वह सूत कातते थे। बापू के चरखा और घड़ी के अलावा उनसे जुड़ी अन्य वस्तुओं की वजह से संग्रहालय में अलग से गांधी बीथिका बना गई है।
दांडी का नमक भी है सुरक्षित
इस गांधी बीथिका में उनकी निशानियां पर्यटकों का ध्यान खींचती रही हैं। इस संग्रहालय को बापू की यह निशानियां वर्ष 1954 में सौंपी गई थीं। संग्रहालय की गांधी बीथिका और स्मृति वाहन के प्रभारी वाबन वानखेड़े बताते हैं कि प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहर लाल नेहरू ने उनके चरखे और घड़ी को संग्रहालय प्रशासन को प्रदान किया था।
दांडी का नमक आज भी है सुरक्षित
वर्ष 1950 में कांग्रेस कमेटी की ओर से प्रस्ताव पारित कर गांधी की इन वस्तुओं को संग्रहालय को दान करने का निर्णय लिया गया था। इतना ही नहीं, नमक आंदोलन से जुड़ी यादें भी यहां ताजा की जा सकती हैं। दांडी यात्रा के दौरान महात्मा गांधी ने जो नमक बनाया था, उसे भी संग्रहालय प्रशासन ने नीलामी में ले कर संग्रहीत कर लिया है। दांडी का नमन छह सौ रुपये में नीलाम हुआ था। इसके अलावा संग्रहालय बापू के हाथ के लिखे कई पत्र भी सहेज कर रखे गए हैं।
संग्रहालय में देखिए गांधी स्मृति वाहन
इलाहाबाद संग्रहालय में गांधी का वो स्मृति वाहन भी है, जिस पर उनका अस्थिकलश लाया गया था। इस अस्थि कलश को फोर्ड कंपनी के वाहन पर सजा कर ले जाया गया था। तब इस वाहन पर जवाहर लाल नेहरू के अलावा सरदार वल्लभ भाई पटेल और गोविंद वल्लभ पंत सवार थे। अस्थि विसर्जन के बाद इस वाहन को गांधी स्मृति वाहन के रूप में संग्रहालय में रखवा दिया गया। बापू की याद में हर वर्ष 13 फरवरी को इस वाहन को आम जनता के दर्शनार्थ रखा जाता है।