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High Court : 18 की आयु पूरी करने पर पिता से भरण पोषण पाने का हकदार नहीं है बेटा, परिवार न्यायालय का आदेश रद्द

Wed, 21 Jan 2026 05:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 21 Jan 2026 05:05 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बेटे के बालिग (18 वर्ष) होने पर पिता से भरण-पोषण का अधिकार खत्म हो जाता है।

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Son is not entitled to receive maintenance from father after attaining the age of 18
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बेटे के बालिग (18 वर्ष) होने पर पिता से भरण-पोषण का अधिकार खत्म हो जाता है। कोर्ट ने इस आधार पर बेटे के पक्ष में परिवार न्यायालय की ओर से जारी भरण-पोषण के आदेश को रद्द कर दिया। वहीं, पत्नी के लिए बढ़ाई गई भरण-पोषण राशि को उचित ठहराते हुए बरकरार रखा। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला की एकल पीठ ने मोअज्जम अली की ओर से दायर याचिका पर दिया है।

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याची पति ने परिवार न्यायालय भदोही के चार अगस्त 2023 के आदेश से पत्नी और बेटे के पक्ष में भरण-पोषण की राशि में की गई बढ़ोतरी को हाईकोर्ट में दी चुनौती दी थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आवेदक को परिवार न्यायालय से कोई नोटिस या समन कानूनी प्रक्रिया के अनुसार प्राप्त नहीं हुआ था। यह भी दलील दी कि बेटा जन्म प्रमाणपत्र के अनुसार पांच जनवरी 2023 को ही वयस्क हो चुका था। अतः उसके लिए भरण-पोषण का आदेश अवैध है। याची पर पांच बच्चों की जिम्मेदारी है।
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ऐसे में गुजारा-भत्ता राशि पत्नी के लिए 1000 से बढ़ाकर 6000 और बेटे के लिए 500 से अब 4000 रुपये देना उसकी क्षमता से बाहर है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि बेटा बालिग हो चुका है। इस आधार पर कोर्ट ने उसके संबंध में जारी भरण-पोषण का आदेश रद्द कर दिया। हालांकि, पत्नी के लिए बढ़ाई गई राशि 6,000 रुपये को कोर्ट ने आज के समय के अनुसार अत्यधिक नहीं माना। कहा कि पति ने अपनी आय के स्रोतों के संबंध में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए हैं, जिससे उसकी असमर्थता सिद्ध हो सके। कोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।

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