फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Siats dismisses PIL against conversion

शियाट्स में धर्मांतरण के खिलाफ जनहित याचिका खारिज

Wed, 21 Jan 2015 12:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 21 Jan 2015 12:13 AM IST
विज्ञापन
जनहित याचिकाएं व्यापक जनहित के लिए ही दाखिल की जानी चाहिए, जिन विषयों से आम जनता को राहत मिले। इसे निजी स्वार्थ पूर्ति या लोकप्रियता का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों के प्रति सख्ती का संकेत देते हुए दर्जनों याचिकाएं खारिज कर दी जो मूल विषय से हट कर ‘अलग उद्देश्य’ को लेकर दाखिल की गई थी, या जिनमें याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट रूल्स के मुताबिक स्वयं के बारे में उचित जानकारी नहीं दी थी।
विज्ञापन


सैम हिग्गिनबॉटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शियाट्स) नैनी के खिलाफ दाखिल दो जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ द्वारा यह निरीक्षण दिए गए। खंडपीठ ने कहा कि याचिका में उठाई गई मांग जनहित याचिका के माध्यम से पूरी नहीं हो सकती है। हालांकि खंडपीठ ने याची द्वारा उठाए गए प्रश्नों की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने कहा कि याची की शिकायतों को दूर करने के लिए राज्य प्राधिकारी सक्षम हैं। उनके इस निर्णय से याचिका में उठाई गई आपत्तियों के निस्तारण में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
विज्ञापन


जनहित याचिका में शियाट्स को अवैध रूप से सरकार द्वारा भूमि का अंतरण करने तथा संस्थान के परिसर में जबरन धर्मांतरण कराने के आरोपों की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी। दूसरी जनहित याचिका में संस्थान के निदेशक मंडल द्वारा लगभग 26 बीघा जमीन यीशू दरबार ट्रस्ट को उपयोग के लिए देने की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा डीड ऑफ ट्रस्ट 14 जुलाई 2003 को संपादित की गई। इसके 11 वर्षों के बाद इसे चुनौती देने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। खंडपीठ ने याचिका में लगाए आरोपों की विश्वसनीयता पर बिना कोई टिप्पणी किए कहा कि याची हाईकोर्ट रूल्स के अनुसार स्वयं के संबंध में वांछित जानकारी नहीं दी है इसलिए याचिका पोषणीय नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन


 हाईकोर्ट रूल्स के चैप्टर 22 के रूल वन के सब रूल 3 ए के अनुसार जनहित याचिका दाखिल वाले व्यक्ति को विशेष तौर पर आवश्यक रूप से स्वयं से संबंधित जानकारी (क्रेडेंशियल) देना अनिवार्य है। यह जानकारी उसे शपथपत्र देनी होगी कि जनहित याचिका दाखिल करने वाले व्यक्ति का उस विषय में कोई व्यक्तिगत हित नहीं है। इस शर्त को पूरा नहीं करने के आधार पर याचिकाएं खारिज की जाती हैं। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने हाईकोर्ट रूल्स के अनुसार क्रे डेंशियल नहीं बताने के आधार पर गत सप्ताह विजय बहादुर सिंह व अन्य बनाम राज्य सरकार, नवनीत कुमार अग्रवाल बनाम राज्य सरकार, जगमोहन बनाम राज्य सरकार, संतोष सिंह बनाम राज्य सरकार सहित कई जनहित याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed