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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Shahi Idgah Masjid Case Hindu side said 1968 agreement is fraud of Waqf Board and not cooperating

Shahi Idgah Masjid Case: हिंदू पक्ष बोला- '1968 का समझौता' वक्फ बोर्ड की धोखाधड़ी, नहीं कर रहा सहयोग

Wed, 15 May 2024 11:10 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 15 May 2024 11:10 PM IST
सार

श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। न्यायालय को बताया कि दोनों पक्षों के बीच 1968 में किया गया समझौता सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद समिति द्वारा की गई धोखाधड़ी थी।

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Shahi Idgah Masjid Case Hindu side said 1968 agreement is fraud of Waqf Board and not cooperating
श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह विवाद मामले में वाद की पोषणीयता को लेकर न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की कोर्ट में बुधवार को भी सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड न्यायालय की प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहा है। मामले में आज भी बहस होगी। 

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हिंदू पक्ष ने बुधवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय को बताया कि दोनों पक्षों के बीच 1968 में किया गया समझौता सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद समिति द्वारा की गई धोखाधड़ी थी। हिंदू पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि यह संपत्ति  एक हजार साल से अधिक समय से देवता कटरा केशव देव की है। भगवान कृष्ण के जन्मस्थान को 16वीं शताब्दी में ध्वस्त कर दिया गया था। ईदगाह के रूप में एक चबूतरे का निर्माण किया गया था।
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और संस्थान के अधिवक्ता हरेराम त्रिपाठी व प्रणय ओझा ने संयुक्त रूप से सात मई के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की ओर से बार-बार समय देने के बाद भी सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से आवश्यक शपथपत्र पक्षकारों को उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। न्यायालय की प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा उत्पन्न की जा रही है। जबकि, मुस्लिम पक्ष ने किसी को भी शपथपत्र दाखिल करने का अतिरिक्त समय न दिए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था।   
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वहीं, वाद संख्या तीन, चार व पांच की ओर से अधिवक्ता विनय शर्मा ने पक्ष रखते हुए कहा कि प्रस्तुत मामले में विशेष उपासना अधिनियम, परिसीमा अधिनियम, वक्फ एक्ट के प्रावधान लागू नहीं हैं। ठाकुर जी एक विधिमान्य शाश्वत शिशु स्वरूप आराध्य हैं। इसलिए इस विवादित मामले का विचारण कर शीघ्र निस्तारण किया जाना चाहिए।

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