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डेंगू के सात और मामले आए सामने, एक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 11 Sep 2016 02:10 AM IST
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Dengue
- फोटो : Amar ujala
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इलाहाबाद। डेंगू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को इसकी चपेट में आकर बांदा के रहने वाले रामजनक (50) की निजी अस्पताल में मौत हो गई जबकि सात नए मरीजों में इसके लक्षण पॉजीटिव पाए गए हैं। जांच के लिए नमूना मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज भेजा गया था। विभाग ने इसकी पुष्टि कर दी है। मरीजों का उपचार सरकारी और निजी अस्पतालों में चल रहा है।
बहादुरगंज के रहने वाले अभय गुप्ता की तबीयत एक हफ्ते पहले खराब हुई थी। उसे पहले पास के डॉक्टर को दिखाया लेकिन आराम नहीं मिला तो शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए नमूना जमा किया गया तो रिपोर्ट पॉजीटिव आ गई है। अभय की हालत स्थिर बनी हुई है। डेंगू के और जिन मामलों की पुष्टि हुई है उसमें कानपुर से आईं सुधा शर्मा, लखनऊ से आए अभिषेक, गुडगांव के अंकित यादव, मुंबई से आए रामचंद्र और मो. अदन और दिल्ली से आए शुभम में इसके लक्षण मिले हैं। सुधा का उपचार बेली अस्पताल में चल रहा है जबकि बाकी पांच मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
डेंगू की रिपोर्ट जानने के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई
मच्छरों को मारने के लिए दवा का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा
इलाहाबाद। जिले में लगातार बढ़ रहे डेंगू के मामलों की जानकारी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग चुप है। डेंगू के मरीजों के घरों पर न तो दवा का छिड़काव हो रहा है और न ही किसी तरह के एहतियात बरते जाने की बात लोगों को बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से रिपोर्ट लेते हैं और उसके बाद रिपोर्ट को जिला मलेरियाधिकारी और जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी को दे दी जाती है। उसके बाद सब शांत हो जाते हैं। डेंगू मरीजों के यहां पर छिड़काव तक नहीं हो पा रहा है।
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संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. एएन मिश्रा कहते हैं कि डेंगू की रिपोर्ट आने के बाद दवा के छिड़काव के लिए डीएमओ को सूचित किया जा रहा है। दवा का छिड़काव उनकी ओर से कराया जाता है। इस संबंध में जिला मलेरियाधिकारी डॉ. केपी द्विवेदी से बात करने की कई कोशिश की गई लेकिन उन्होंने अपना फोन नहीं उठाया। विभाग के अफसरों का कहना है कि मलेरिया विभाग के अंतर्गत होने वाले काम का बजट सीएमओ के अधीन होता है। उनकी ओर से फंडिंग होने के बाद ही दवाओं का छिड़काव किया जाता है लेकिन अभी तक छिड़काव करने वाली दवाओं के मद में कोई बजट ही नहीं जारी किया गया। इसके चलते मच्छर मारने वाली दवाओं का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। विभाग को आने-जाने के वाहन भी नहीं दिए जा रहे हैं। इसके चलते मलेरिया विभाग का काम प्रभावित है। सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि शहर में दवा छिड़काव की जिम्मेदारी नगर निगम की। फिलहाल वह तीन दिनों से शहर से बाहर हैं। रविवार को शहर पहुंचेंगे तो कार्रवाई करवाएंगे।
बहादुरगंज के रहने वाले अभय गुप्ता की तबीयत एक हफ्ते पहले खराब हुई थी। उसे पहले पास के डॉक्टर को दिखाया लेकिन आराम नहीं मिला तो शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। शनिवार को मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए नमूना जमा किया गया तो रिपोर्ट पॉजीटिव आ गई है। अभय की हालत स्थिर बनी हुई है। डेंगू के और जिन मामलों की पुष्टि हुई है उसमें कानपुर से आईं सुधा शर्मा, लखनऊ से आए अभिषेक, गुडगांव के अंकित यादव, मुंबई से आए रामचंद्र और मो. अदन और दिल्ली से आए शुभम में इसके लक्षण मिले हैं। सुधा का उपचार बेली अस्पताल में चल रहा है जबकि बाकी पांच मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
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डेंगू की रिपोर्ट जानने के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई
मच्छरों को मारने के लिए दवा का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा
इलाहाबाद। जिले में लगातार बढ़ रहे डेंगू के मामलों की जानकारी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग चुप है। डेंगू के मरीजों के घरों पर न तो दवा का छिड़काव हो रहा है और न ही किसी तरह के एहतियात बरते जाने की बात लोगों को बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अफसर मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से रिपोर्ट लेते हैं और उसके बाद रिपोर्ट को जिला मलेरियाधिकारी और जिला संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी को दे दी जाती है। उसके बाद सब शांत हो जाते हैं। डेंगू मरीजों के यहां पर छिड़काव तक नहीं हो पा रहा है।
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संक्रामक रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ. एएन मिश्रा कहते हैं कि डेंगू की रिपोर्ट आने के बाद दवा के छिड़काव के लिए डीएमओ को सूचित किया जा रहा है। दवा का छिड़काव उनकी ओर से कराया जाता है। इस संबंध में जिला मलेरियाधिकारी डॉ. केपी द्विवेदी से बात करने की कई कोशिश की गई लेकिन उन्होंने अपना फोन नहीं उठाया। विभाग के अफसरों का कहना है कि मलेरिया विभाग के अंतर्गत होने वाले काम का बजट सीएमओ के अधीन होता है। उनकी ओर से फंडिंग होने के बाद ही दवाओं का छिड़काव किया जाता है लेकिन अभी तक छिड़काव करने वाली दवाओं के मद में कोई बजट ही नहीं जारी किया गया। इसके चलते मच्छर मारने वाली दवाओं का छिड़काव नहीं हो पा रहा है। विभाग को आने-जाने के वाहन भी नहीं दिए जा रहे हैं। इसके चलते मलेरिया विभाग का काम प्रभावित है। सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा ने कहा कि शहर में दवा छिड़काव की जिम्मेदारी नगर निगम की। फिलहाल वह तीन दिनों से शहर से बाहर हैं। रविवार को शहर पहुंचेंगे तो कार्रवाई करवाएंगे।