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Prayagraj News: पहली छुपाकर दूसरी शादी करने वाले दोषी की सजा घटी, दोषसिद्धि बरकरार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 02:34 AM IST
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Sentence reduced for convict who entered into a second marriage while concealing the first; conviction upheld.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली शादी की जानकारी छुपाकर दूसरी शादी करने और धोखे से संबंध बनाने के मामले में दोषी ठहराए गए बुलंदशहर निवासी राधे श्याम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। हालांकि कोर्ट ने 72 वर्षीय अपीलकर्ता की उम्र, स्वास्थ्य और 39 वर्षों तक लंबित रही अपील को देखते हुए उसकी सजा घटाकर पहले से काटी गई अवधि तक सीमित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने पारित किया।
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अभियोजन के अनुसार जनवरी 1984 में जयराम ने पीड़िता के परिजनों को बताया कि उसका भतीजा राधेश्याम अविवाहित है। इसी भरोसे पर फरवरी 1984 में दोनों का विवाह संपन्न हुआ। विवाह के बाद पीड़िता जब मेरठ स्थित ससुराल पहुंची तो वहां उसे पता चला कि राधेश्याम की एक पत्नी पहले से घर में रह रही है। विरोध करने पर आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद मामला दर्ज कराया गया। ट्रायल कोर्ट ने राधेश्याम को दुष्कर्म, धोखाधड़ी व अन्य मामले में चार वर्ष की सजा सुनाई थी। सह-आरोपी जयराम को भी सजा सुनाई थी लेकिन अपील लंबित रहने के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि राधे श्याम ने विवाह से पहले ही अपनी पहली शादी और कथित तलाक की जानकारी दे दी थी तथा उनकी बिरादरी में आपसी सहमति से तलाक की प्रथा प्रचलित है। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि नोटरी के माध्यम से तैयार किया गया तलाकनामा कानूनन वैध तलाक नहीं माना जा सकता।
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हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोपी की ओर से प्रस्तुत कथित तलाक विलेख किसी सक्षम अदालत की तलाक डिक्री का स्थान नहीं ले सकता। कोर्ट ने राम कृपाल सिंह बनाम मध्य प्रदेश राज्य तथा जतिना समीर शाह बनाम समीर मोहित शाह के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल आपसी समझौते से विवाह समाप्त नहीं माना जा सकता। इन परिस्थितियों में कोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा घटा दी।
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