{"_id":"5d02ad0fbdec226dc578985e","slug":"seems-to-be-sent-to-the-sessions-or-the-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेशन या हाईकोर्ट में दाखिल हो सकेगी अग्रिम जमानत अर्जी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सेशन या हाईकोर्ट में दाखिल हो सकेगी अग्रिम जमानत अर्जी
Fri, 14 Jun 2019 01:37 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 14 Jun 2019 01:37 AM IST
विज्ञापन
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
लंबे इंतजार के बाद प्रदेश सरकार ने सूबे में अग्रिम जमानत का प्रावधान फिर से लागू कर दिया है। दंड प्रक्रिया संहिता का उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक एक जून को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद छह जून से प्रदेश में लागू हो गया है। इससे संबंधित गजट अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई है। अग्रिम जमानत प्रावधान लागू होने से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो किसी वजह से गैरजमानती अपराध की धारा में नामजद हो गए हैं और गिरफ्तारी की आशंका है।
अग्रिम जमानत की अर्जी अपने जिले की ही सेशन कोर्ट में या सीधे हाईकोर्ट में दाखिल की जा सकेगी। विशेष बात यह है नियमित जमानत की तरह अग्रिम जमानत में आरोपी को स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं होना होगा। वह अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत अर्जी प्रस्तुत कर जमानत की मांग कर सकेगा। यदि न्यायालय को लगता है कि प्रस्तुत मामले में जमानत मंजूर की जा सकती है तो वह इस आशय का अंतरिम आदेश पारित कर सकेगी।
इन बातों पर विचार के मिलेगी अग्रिम जमानत
अग्रिम जमानत के प्रावधान धारा 438 (1) के अनुसार न्यायालय अग्रिम जमानत मंजूर करने से पहले अपराध की प्रकृति, आवेदक के आपराधिक इतिहास और आवेदक को नुकसान पहुंचाने या बदनाम करने की संभावना पर विचार करने के बाद आदेश पारित करेगा। यदि अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज हो जाती है तो पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकेगी।
विज्ञापन
शर्तें लगा सकती है अदालत
धारा 438(2) सीआरपीसी के अनुसार अग्रिम जमानत अर्जी यदि मंजूर होती है तो उसके साथ शर्त होती कि आवेदक पूछताछ हेतु पुलिस के बुलाने पर उपस्थित होगा, किसी गवाह को प्रलोभन या धमकी नहीं देगा, न्यायालय की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा।
गंभीर अपराधों में नहीं मिलेगी अंतरिम जमानत
गंभीर अपराधों में अग्रिम जमानत पाने का अधिकार नहीं होगा। इनमें सेवन सीएलए एक्ट, ड्रग्स एंड नारकोटिक्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट के अलावा ऐसे अपराध जिसमें मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान हैं अग्रिम जमानत के दायरे में नहीं आएंगे। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने के बाद आवेदक सेशनकोर्ट में अर्जी नहीं दे सकेगा। न्यायालय को अर्जी दाखिल होने के 30 दिन के भीतर इस पर निर्णय करना होगा।
वादकारियों को मिलेगी राहत: डीजीसी
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी(डीजीसी) गुलाब चंद्र अग्रहरि का कहना है कि अग्रिम जमानत प्रावधान लागू होने से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो किसी पेशबंदी या रंजिश के कारण मुकदमों में फंसा दिए जाते हैं। ऐसे लोगों के पास अब गिरफ्तार होने से पूर्व ही जमानत पाने का विकल्प होगा।
विज्ञापन
अग्रिम जमानत की अर्जी अपने जिले की ही सेशन कोर्ट में या सीधे हाईकोर्ट में दाखिल की जा सकेगी। विशेष बात यह है नियमित जमानत की तरह अग्रिम जमानत में आरोपी को स्वयं अदालत में उपस्थित नहीं होना होगा। वह अधिवक्ता के माध्यम से अग्रिम जमानत अर्जी प्रस्तुत कर जमानत की मांग कर सकेगा। यदि न्यायालय को लगता है कि प्रस्तुत मामले में जमानत मंजूर की जा सकती है तो वह इस आशय का अंतरिम आदेश पारित कर सकेगी।
विज्ञापन
इन बातों पर विचार के मिलेगी अग्रिम जमानत
अग्रिम जमानत के प्रावधान धारा 438 (1) के अनुसार न्यायालय अग्रिम जमानत मंजूर करने से पहले अपराध की प्रकृति, आवेदक के आपराधिक इतिहास और आवेदक को नुकसान पहुंचाने या बदनाम करने की संभावना पर विचार करने के बाद आदेश पारित करेगा। यदि अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज हो जाती है तो पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकेगी।
विज्ञापन
शर्तें लगा सकती है अदालत
धारा 438(2) सीआरपीसी के अनुसार अग्रिम जमानत अर्जी यदि मंजूर होती है तो उसके साथ शर्त होती कि आवेदक पूछताछ हेतु पुलिस के बुलाने पर उपस्थित होगा, किसी गवाह को प्रलोभन या धमकी नहीं देगा, न्यायालय की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेगा।
गंभीर अपराधों में नहीं मिलेगी अंतरिम जमानत
गंभीर अपराधों में अग्रिम जमानत पाने का अधिकार नहीं होगा। इनमें सेवन सीएलए एक्ट, ड्रग्स एंड नारकोटिक्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट के अलावा ऐसे अपराध जिसमें मृत्यु दंड तक की सजा का प्रावधान हैं अग्रिम जमानत के दायरे में नहीं आएंगे। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल करने के बाद आवेदक सेशनकोर्ट में अर्जी नहीं दे सकेगा। न्यायालय को अर्जी दाखिल होने के 30 दिन के भीतर इस पर निर्णय करना होगा।
वादकारियों को मिलेगी राहत: डीजीसी
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी(डीजीसी) गुलाब चंद्र अग्रहरि का कहना है कि अग्रिम जमानत प्रावधान लागू होने से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो किसी पेशबंदी या रंजिश के कारण मुकदमों में फंसा दिए जाते हैं। ऐसे लोगों के पास अब गिरफ्तार होने से पूर्व ही जमानत पाने का विकल्प होगा।