फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   SC/ST Act provisions cannot be invoked on grounds of belonging to a Scheduled Caste or Scheduled Tribe.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा : अनुसूचित जाति होने मात्र से एससी-एसटी एक्ट नहीं लगता, अपमान जाति के कारण होना जरूरी

Sat, 12 Sep 2026 04:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 12 Sep 2026 04:08 PM IST
सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य होने मात्र से एससी-एसटी एक्ट की धाराएं लागू नहीं हो जातीं। आरोपी का कृत्य ऐसा होना चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो कि उसने पीड़ित को उसकी जाति के कारण जानबूझकर अपमानित या प्रताड़ित किया।

विज्ञापन
SC/ST Act provisions cannot be invoked on grounds of belonging to a Scheduled Caste or Scheduled Tribe.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

विज्ञापन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद में जमीन के लेनदेन से जुड़े मामले में आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को निरस्त कर दिया है। हालांकि धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक षड्यंत्र, गाली-गलौज और धमकी के आरोपों में मुकदमे की कार्यवाही जारी रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने दिया। गाजियाबाद के लोनी थाने में वर्ष 2025 में याची के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के साथ जालसाजी, धोखाधड़ी और अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए आरोपी को समन जारी किया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर समन/संज्ञान आदेश सहित पूरी आपराधिक कार्यवाही निरस्त करने की मांग की। याची के अधिवक्ता मोहम्मद समीउज्जमा खान ने दलील दी कि मामला बंथला गांव के खसरा संख्या 1245 से जुड़ी जमीन के लेनदेन का है। मूल रूप से यह दीवानी विवाद है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया। कथित जातिसूचक टिप्पणी को सार्वजनिक रूप से किए जाने का भी कोई स्पष्ट आरोप नहीं है।

विज्ञापन

जातिसूचक शब्दों का नहीं मिला रिकॉर्ड

हाईकोर्ट ने एफआईआर और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी ने पीड़ित को उसकी जाति के आधार पर जातिसूचक शब्द कहे या जानबूझकर अपमानित किया। कोर्ट ने यह भी पाया कि अभियोजन यह प्रदर्शित नहीं कर सका कि कथित अपमान सार्वजनिक रूप से हुआ था और आरोपी का उद्देश्य पीड़ित को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य होने के कारण अपमानित करना था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल पीड़ित के एससी/एसटी समुदाय से संबंधित होने के आधार पर एससी-एसटी एक्ट की धाराएं नहीं लगाई जा सकतीं। अपराध के आवश्यक तत्वों का आरोप और प्रथमदृष्टया समर्थन करने वाली सामग्री रिकॉर्ड पर होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने आपराधिक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए एससी-एसटी एक्ट के तहत जारी समन/संज्ञान आदेश रद्द कर दिया। वहीं धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग, आपराधिक षड्यंत्र, गाली-गलौज और धमकी से जुड़े आरोपों में ट्रायल जारी रखने का आदेश दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed