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संत ज्ञानेश्वर हत्याकांड के आरोपियों को बरी
Tue, 02 Apr 2019 02:13 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 02 Apr 2019 02:13 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संत ज्ञानेश्वर स्वामी सदानंद जी परमहंस सहित आठ लोगों की हत्या के आरोपियों को सत्र न्यायाधीश द्वारा बरी करने के आदेश को सही माना है। साथ ही आरोपियों को बरी करने के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। सत्र न्यायाधीश ने अखिलेश सिंह, चंद्रभद्र सिंह सोनू, यशभद्र सिंह मोनू व विजय यादव को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया था।
यह आदेश न्यायमूर्ति राम सूरत राम मौर्या तथा न्यायमूर्ति अनिल कुमार नवम की खंडपीठ ने इंद्रदेव तिवारी व सरकारी अपील पर दिया है। आरोपियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी व अजातशत्रु पांडेय ने बहस की और कहा कि सत्र न्यायालय का आदेश सही है।
इंद्रदेव तिवारी ने 10 फरवरी 2006 को हंडिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें जीटी रोड पर माघ मेला प्रयाग से वाराणसी जाते समय संत ज्ञानेश्वर के काफिले पर फायरिंग कर हत्या करने का आरोप लगाया गया था। जिसमें संत ज्ञानेश्वर सहित आठ लोग मारे गए और पांच घायल हुए थे। अन्य घायलों के साथ दिव्या त्रिपाठी स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती हुई और तीन साल बाद उनकी मौत हो गई। सत्र न्यायाधीश ने मृत्यु कालिक बयान को पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना। अन्य ठोस साक्ष्य के आभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था। आरोपियों का कहना था कि संत ज्ञानेश्वर माफिया अपराधी थे। रंजिश के कारण उन्हे फंसाया गया है। वे निर्दोष हैं।
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यह आदेश न्यायमूर्ति राम सूरत राम मौर्या तथा न्यायमूर्ति अनिल कुमार नवम की खंडपीठ ने इंद्रदेव तिवारी व सरकारी अपील पर दिया है। आरोपियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता जीएस चतुर्वेदी व अजातशत्रु पांडेय ने बहस की और कहा कि सत्र न्यायालय का आदेश सही है।
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इंद्रदेव तिवारी ने 10 फरवरी 2006 को हंडिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें जीटी रोड पर माघ मेला प्रयाग से वाराणसी जाते समय संत ज्ञानेश्वर के काफिले पर फायरिंग कर हत्या करने का आरोप लगाया गया था। जिसमें संत ज्ञानेश्वर सहित आठ लोग मारे गए और पांच घायल हुए थे। अन्य घायलों के साथ दिव्या त्रिपाठी स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती हुई और तीन साल बाद उनकी मौत हो गई। सत्र न्यायाधीश ने मृत्यु कालिक बयान को पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना। अन्य ठोस साक्ष्य के आभाव में आरोपियों को बरी कर दिया था। आरोपियों का कहना था कि संत ज्ञानेश्वर माफिया अपराधी थे। रंजिश के कारण उन्हे फंसाया गया है। वे निर्दोष हैं।
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