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संग रहा पूजा, सेवा का संस्कार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:23 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बेहद सादगी भरा जीवन जीने वाली अत्यंत विनम्र, सहज, सौम्य, शिष्ट और शालीन, प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी की पत्नी जसोदा बेन मोदी वृहस्पतिवार को संगमनगरी पहुंचीं तो अपने गुण और संस्कार संग लाईं। उनकी इलाहाबाद यात्रा में भी यह बखूबी दिखा। ईश्वर के प्रति अनन्य आस्था और समाजसेवा का जज्बा, दोनों वफादार सुरक्षाकर्मियों की तरह संग रहे।
पहले मेहसाणा से नई दिल्ली और फिर र्नई दिल्ली से इलाहाबाद की लंबी यात्रा में थकान रही। इसके बावजूद संगमनगरी पहुंचने के बाद तैयार होकर वह मंदिर जाना नहीं भूलीं। उन्होंने सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन पहुंचकर सबसे पहले शिवलिंग पर अभिषेक किया। सर्वांग रूप हनुमान के दर्शन के लिए मुख्य मंदिर गईं। वहां से निकलकर परिसर में ही बने शनि विग्रह को भी प्रणाम किया और फिर सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल लौट आईं।
थोड़ी देर आराम करने के बाद माथे पर बिंदी और सिंदूर लगाए हरे और नीले रंग की साड़ी पहने जसोदा बेन बाहर वेटिंग रूम में पहुंचीं तो साहू समाज के लोगों ने फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया और पांव छूकर आशीर्वाद लिया। केपी कॉलेज में बने मंच पर भी उनका यही सौम्य रूप दिखा। घोड़ी पर सवार होकर दूल्हे जब मंच के सामने से गुजरे तो हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करने के साथ ही मुस्कुरा कर उनका स्वागत भी किया। संग आए जसोदा बेन से छोटे अशोक भाई ने कहा, बहनजी का पूजा और व्रत का नियम कभी नहीं छूटता है। वृहस्पतिवार को भी उनका व्रत रहा। वैसे भी वह गाय को खिलाने के बाद ही कुछ खाती हैं। उनके लिए भक्ति ही जीवन है। जसोदा बेन के साथ भाभी यानी अशोक भाई की पत्नी जसोदा बेन और समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नानकजी राठौर की पत्नी रजनी राठौर पूरे समय तक साए की तरह रहीं।
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पहले मेहसाणा से नई दिल्ली और फिर र्नई दिल्ली से इलाहाबाद की लंबी यात्रा में थकान रही। इसके बावजूद संगमनगरी पहुंचने के बाद तैयार होकर वह मंदिर जाना नहीं भूलीं। उन्होंने सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन पहुंचकर सबसे पहले शिवलिंग पर अभिषेक किया। सर्वांग रूप हनुमान के दर्शन के लिए मुख्य मंदिर गईं। वहां से निकलकर परिसर में ही बने शनि विग्रह को भी प्रणाम किया और फिर सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल लौट आईं।
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थोड़ी देर आराम करने के बाद माथे पर बिंदी और सिंदूर लगाए हरे और नीले रंग की साड़ी पहने जसोदा बेन बाहर वेटिंग रूम में पहुंचीं तो साहू समाज के लोगों ने फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया और पांव छूकर आशीर्वाद लिया। केपी कॉलेज में बने मंच पर भी उनका यही सौम्य रूप दिखा। घोड़ी पर सवार होकर दूल्हे जब मंच के सामने से गुजरे तो हाथ जोड़कर उन्हें प्रणाम करने के साथ ही मुस्कुरा कर उनका स्वागत भी किया। संग आए जसोदा बेन से छोटे अशोक भाई ने कहा, बहनजी का पूजा और व्रत का नियम कभी नहीं छूटता है। वृहस्पतिवार को भी उनका व्रत रहा। वैसे भी वह गाय को खिलाने के बाद ही कुछ खाती हैं। उनके लिए भक्ति ही जीवन है। जसोदा बेन के साथ भाभी यानी अशोक भाई की पत्नी जसोदा बेन और समाज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नानकजी राठौर की पत्नी रजनी राठौर पूरे समय तक साए की तरह रहीं।
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