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बीमार साधु को एसआरएन अस्पताल से बाहर फेंका
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 03 May 2018 01:15 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सड़क किनारे दर्द से कराह रहे बीमार साधु की पीड़ा देखकर पसीजे राहगीरों ने उन्हें सहारा देकर एसआरएन अस्पताल की इमरजेंसी तक पहुंचाया लेकिन मददगारों के जाने के बाद डॉक्टरों ने उनसे किनारा कर लिया। साधु के मुताबिक उन्हें डॉक्टरों के कहने पर वहां के कर्मचारी अस्पताल से बाहर फेंक आए। डॉक्टरों की इस अमानवीय कृत्य पर मददगारों ने एफआईआर दर्ज कराने की बात कही तो हड़कंप मच गया। बुधवार को लाल बत्ती तक घिसटकर पहुंचे साधु को काफी दबाव के बाद एसआरएन अस्पताल के वार्ड एक में भर्ती किया गया है।
वाकया 29 अप्रैल की शाम करीब सात बजे का है। हाईकोर्ट सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवान अखिलेश यादव और श्याम सुंदर दास रेस्ट टाइम में घूमने निकले थे। सिविल लाइंस में पत्थर गिरजाघर के पास उन्हें दर्द से कराहता एक बुजुर्ग साधु वेश धारी दिखा। पूछने पर उन्होंने अपना नाम गुरादास नारायण स्थान अयोध्या बताया। तभी वहां हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रजेंद्र कुमार पांडेय पहुंचे। गाड़ी रोककर जब उन्होंने मामले की जानकारी ली तो उनका मन भी द्रवित हो गया। ब्रजेंद्र ने 108 नंबर डायल किया तो थोड़ी देर बाद वहां एंबुलेंस पहुंच गई। साधु का प्राथमिक उपचार कर उन्हें एसआरएन की इमरजेंसी कक्ष ले जाया गया।
अधिवक्ता ब्रजेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि औपचारिकताएं पूरी कर ड्यूटी पर तैनात अस्पताल कर्मियों और डॉक्टर से साधु गुरादास को भर्ती करने का अनुरोध किया। डॉक्टरों ने कहा कि प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। 30 अप्रैल को अस्पताल पहुंचे साधु के मददगार अखिलेश और श्याम सुंदर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि मरीज खुद को स्वस्थ बताकर यहां से चला गया। एक मई को इसकी सूचना पाकर ब्रजेंद्र पांडेय अस्पताल पहुंचे तो उन्हें गड़बड़ी का आभास हुआ। काफी खोजबीन के बाद भी साधु का पता नहीं चला तो ब्रजेंद्र ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही। मंगलवार को यूको बैंक में चोरी की घटना में पुलिस उलझी थी, सो उन्हें बुधवार को बुलाया गया।
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बुधवार को एसआरएन अस्पताल पहुंचे अधिवक्ता ब्रजेंद्र पांडेय इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों-कर्मचारियों से साधु गुरादास के बारे में जानकारी ले रहे थे, तभी किसी ने बताया कि एक साधु लाल बत्ती के पास हॉल में पड़े कराह रहे हैं। वहां पहुंचने पर गुरादास ने बताया कि देर रात डॉक्टरों के कहने पर अस्पताल कर्मचारी उन्हें अस्पताल से बाहर फेंक आए। वह किसी तरह घिसटते हुए यहां तक पहुंचे हैं। दो दिन से उन्हें कोई पूछने नहीं आया। काफी बहस के बाद साधु को डॉक्टरों ने गुरादास को परीक्षण किया फिर उन्हें वार्ड एक में भर्ती किया।
-मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मरीज का भी बयान दर्ज कराया जाएगा।
- डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य एमएलएन मेडिकल कॉलेज
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वाकया 29 अप्रैल की शाम करीब सात बजे का है। हाईकोर्ट सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ के जवान अखिलेश यादव और श्याम सुंदर दास रेस्ट टाइम में घूमने निकले थे। सिविल लाइंस में पत्थर गिरजाघर के पास उन्हें दर्द से कराहता एक बुजुर्ग साधु वेश धारी दिखा। पूछने पर उन्होंने अपना नाम गुरादास नारायण स्थान अयोध्या बताया। तभी वहां हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष ब्रजेंद्र कुमार पांडेय पहुंचे। गाड़ी रोककर जब उन्होंने मामले की जानकारी ली तो उनका मन भी द्रवित हो गया। ब्रजेंद्र ने 108 नंबर डायल किया तो थोड़ी देर बाद वहां एंबुलेंस पहुंच गई। साधु का प्राथमिक उपचार कर उन्हें एसआरएन की इमरजेंसी कक्ष ले जाया गया।
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अधिवक्ता ब्रजेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि औपचारिकताएं पूरी कर ड्यूटी पर तैनात अस्पताल कर्मियों और डॉक्टर से साधु गुरादास को भर्ती करने का अनुरोध किया। डॉक्टरों ने कहा कि प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया जाएगा। 30 अप्रैल को अस्पताल पहुंचे साधु के मददगार अखिलेश और श्याम सुंदर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि मरीज खुद को स्वस्थ बताकर यहां से चला गया। एक मई को इसकी सूचना पाकर ब्रजेंद्र पांडेय अस्पताल पहुंचे तो उन्हें गड़बड़ी का आभास हुआ। काफी खोजबीन के बाद भी साधु का पता नहीं चला तो ब्रजेंद्र ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही। मंगलवार को यूको बैंक में चोरी की घटना में पुलिस उलझी थी, सो उन्हें बुधवार को बुलाया गया।
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बुधवार को एसआरएन अस्पताल पहुंचे अधिवक्ता ब्रजेंद्र पांडेय इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों-कर्मचारियों से साधु गुरादास के बारे में जानकारी ले रहे थे, तभी किसी ने बताया कि एक साधु लाल बत्ती के पास हॉल में पड़े कराह रहे हैं। वहां पहुंचने पर गुरादास ने बताया कि देर रात डॉक्टरों के कहने पर अस्पताल कर्मचारी उन्हें अस्पताल से बाहर फेंक आए। वह किसी तरह घिसटते हुए यहां तक पहुंचे हैं। दो दिन से उन्हें कोई पूछने नहीं आया। काफी बहस के बाद साधु को डॉक्टरों ने गुरादास को परीक्षण किया फिर उन्हें वार्ड एक में भर्ती किया।
-मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मरीज का भी बयान दर्ज कराया जाएगा।
- डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य एमएलएन मेडिकल कॉलेज