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Prayagraj News: सियाचिन में गश्त करेगा रोबोटिक कुत्ता, प्रलय बनकर आसमान से बरसेगी स्वदेशी मौत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 May 2026 02:53 AM IST
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Robotic dogs will patrol Siachen, indigenous death will rain down from the sky like a cataclysm
प्रयागराज में संगम की रेती पर आयोजित रक्षा तकनीक के महाकुंभ ने पूरी दुनिया को न्यू इंडिया के बढ़ते कदमों का अहसास करा दिया है। इस भव्य प्रदर्शनी में भारतीय मेधा और स्वदेशी तकनीक का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने यह साफ कर दिया कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए दुनिया पर निर्भर रहने वाला देश नहीं, बल्कि खुद भविष्य गढ़ने वाला रक्षा सुपरपावर बन चुका है। अत्याधुनिक हथियारों और उपकरणों के बीच सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र एआई-पावर्ड रोबोटिक म्यूल रहा, जो चार पैरों वाला एक रोबोटिक कुत्ता है। यह रोबोटिक कुत्ता सियाचिन जैसी दुर्गम और बर्फीली चोटियों पर बिना थके भारी वजन ढोने में सक्षम है।
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इसकी खास बात यह है कि 360-डिग्री कैमरों और रडार से लैस यह मशीन अंधेरे में भी दुश्मन की हर हरकत पर पैनी नजर रखेगी, जिससे सीमाओं पर घुसपैठ की हर कोशिश नाकाम होगी। इसके अलावा आसमान से दुश्मन को तबाह करने के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स का प्रलय ड्रोन अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवा रहा है। इसके बारे में बताया गया कि यह एक घातक सुसाइड ड्रोन है, जो 250 किलोमीटर के दायरे में तीन घंटे तक मंडराते हुए दुश्मन की टोह ले सकता है। जैसे ही लक्ष्य की पहचान होती है, यह कामिकेज़ मोड में आकर खुद को धमाके के साथ दुश्मन के ठिकाने पर झोंक देता है। हवाई हमलों के साथ-साथ आपदा प्रबंधन में भी भारतीय तकनीक ने नया कीर्तिमान रचा है। प्रदर्शनी में पेश किया गया अग्नि रक्षक-वायु ड्रोन आग की विभीषिका से निपटने में गेमचेंजर साबित होगा। यह ड्रोन 80 मीटर की ऊंचाई से पानी की जबरदस्त बौछार कर तेल डिपो और गोला-बारूद के गोदामों जैसी खतरनाक जगहों पर लगी आग को बुझाने में सक्षम है। इसके थर्मल सेंसर धुएं के गुबार के पार भी मलबे में दबे घायलों की सटीक लोकेशन ढूंढ सकते हैं।
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15 मिनट में खाई पर बिछेगा 50 मीटर लंबा पुल, दुर्गम पहाड़ों में अब चीते की रफ्तार से दौड़ेगी भारतीय सेना
प्रयागराज। रक्षा तकनीक के महाकुंभ नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 में स्वदेशी इंजीनियरिंग का एक ऐसा चमत्कार देखने को मिला, जिसने सैन्य विशेषज्ञों को भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। कोबरा ऑडिटोरियम में सजी इस प्रदर्शनी में ब्रिस्क ऑलिव द्वारा विकसित दुनिया का पहला 50 मीटर लंबा रैपिड फोल्डेबल ब्रिज आकर्षण का केंद्र बना रहा। उच्च शक्ति वाले विशेष एल्युमिनियम अलॉय से तैयार यह जादुई पुल युद्ध जैसी आपातकालीन स्थितियों में सेना की गतिशीलता को एक नई और अचूक रफ्तार देने के लिए तैयार है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि महज 15 से 20 मिनट के भीतर इसे किसी भी गहरी खाई या नाले के ऊपर बिछाया जा सकता है, जिससे सेना के भारी वाहनों और टैंकों का रास्ता बिना किसी बाधा के सुगम हो जाएगा। दुर्गम पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां सड़कें बनाना या पक्के पुल तैयार करना महीनों का काम होता है, वहां यह तकनीक भारतीय सेना के लिए गेमचेंजर साबित होगी। यदि बाधा 50 मीटर से अधिक चौड़ी है, तो ऐसे दो पुलों को आपस में जोड़कर 100 मीटर तक का रास्ता मिनटों में तैयार किया जा सकता है। हल्का होने के बावजूद यह पुल इतना मजबूत है कि भारी-भरकम सैन्य साजो-सामान का वजन आसानी से झेल सकता है।
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