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लगातार विवादों में रहे हैं कुलपति प्रोफेसर हांगलू
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 10 Feb 2017 01:46 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय 7
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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कुलपति के खिलाफ नाराजगी की शुरुआत विवादित बयानबाजी से हुई। सार्वजनिक मंच तक पर उन्होंने कई अध्यापकों पर व्यक्तिगत आरोप लगाए। इसके बाद पुनर्नियुक्ति की व्यवस्था खत्म करने, अध्यापकों को सत्र लाभ नहीं दिए जाने समेत कई फैसलों ने शिक्षकों के बड़े वर्ग को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया है। कुलपति से मिलने जाने वालों के मोबाइल रखवाने और इंतजार कराने समेत कई ऐसे व्यवहारिक पहलू भी हैं, जिससे अध्यापकों में नाराजगी है। इतना ही नहीं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा कई भाजपा नेताओं में उनके खिलाफ नाराजगी है।
इन विवादों के बीच प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने, परीक्षा में धांधली के विरोध में छात्रों के आंदोलन तथा उनके निष्कासन की गूंज संसद तक में सुनाई दी। अध्यापकों तथा छात्र नेताओं की शिकायतों की बाबत राष्ट्रपति ने उनसे जवाब भी मांगा है। इसके मद्देनजर कुलपति पर इस कदर दबाव बना कि एक बारगी तो उनके इस्तीफे की चर्चा होने लगी।
गौर करने वाली बात यह भी है कि चौतरफा दबाव बनने के बाद कुलपति को प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने, छात्रों का निष्कासन तथा निलंबन वापस लेने, सत्र लाभ की व्यवस्था फिर से बहाल करने समेत कई बिंदुओं पर पुराने फैसले बदलने पड़े। इसके अलावा हाईकोर्ट के कई फैसले भी विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ गए हैं।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सोमवार को परिसर खुलने पर एक बार फिर बड़े आंदोलन के साथ स्थिति बिगड़ने की आशंका है। शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा तो शुक्रवार को माघी पूूर्णिमा की छुट्टी रहेगी। इस तरह से अब सोमवार को विश्वविद्यालय खुलेगा। उस दिन कुलपति के भी परिसर में होने की उम्मीद है। ऐसे में सोमवार को बवाल की आशंका है।
‘विश्वविद्यालय की पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट से राष्ट्रपति और एमएचआरडी मंत्री से अवगत कराया जाएगा। प्रोफेसर हांगलू के खिलाफ पूर्व में भी शिकायत हुई है। छात्रों पर लाठीचार्ज, आत्मदाह की मंत्रालय के स्तर पर भी जांच कराई जाएगी।’
महेंद्रनाथ पांडेय, केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री
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इन विवादों के बीच प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने, परीक्षा में धांधली के विरोध में छात्रों के आंदोलन तथा उनके निष्कासन की गूंज संसद तक में सुनाई दी। अध्यापकों तथा छात्र नेताओं की शिकायतों की बाबत राष्ट्रपति ने उनसे जवाब भी मांगा है। इसके मद्देनजर कुलपति पर इस कदर दबाव बना कि एक बारगी तो उनके इस्तीफे की चर्चा होने लगी।
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गौर करने वाली बात यह भी है कि चौतरफा दबाव बनने के बाद कुलपति को प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प दिए जाने, छात्रों का निष्कासन तथा निलंबन वापस लेने, सत्र लाभ की व्यवस्था फिर से बहाल करने समेत कई बिंदुओं पर पुराने फैसले बदलने पड़े। इसके अलावा हाईकोर्ट के कई फैसले भी विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ गए हैं।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सोमवार को परिसर खुलने पर एक बार फिर बड़े आंदोलन के साथ स्थिति बिगड़ने की आशंका है। शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा तो शुक्रवार को माघी पूूर्णिमा की छुट्टी रहेगी। इस तरह से अब सोमवार को विश्वविद्यालय खुलेगा। उस दिन कुलपति के भी परिसर में होने की उम्मीद है। ऐसे में सोमवार को बवाल की आशंका है।
‘विश्वविद्यालय की पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी गई है। इस रिपोर्ट से राष्ट्रपति और एमएचआरडी मंत्री से अवगत कराया जाएगा। प्रोफेसर हांगलू के खिलाफ पूर्व में भी शिकायत हुई है। छात्रों पर लाठीचार्ज, आत्मदाह की मंत्रालय के स्तर पर भी जांच कराई जाएगी।’
महेंद्रनाथ पांडेय, केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री