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Prayagraj News: कमजोर इम्युनिटी से क्रिप्टोकोकल संक्रमण का खतरा
Thu, 06 Aug 2026 02:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:13 AM IST
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मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (एमएलएन) में किए गए एक अध्ययन में क्रिप्टोकोकल संक्रमण से होने वाले जोखिमों का पता चला है। अध्ययन में 500 नमूनों में से 37 (7.6 फीसदी) में क्रिप्टोकोकल संक्रमण की पुष्टि हुई। यह संक्रमण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली (वीक इम्युनिटी) वाले व्यक्तियों के लिए गंभीर खतरा है।
एमएलएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलाॅजी व न्यूरोलॉजी की ओर से दिसंबर 2024 यह अध्ययन शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के तृतीयक देखभाल अस्पताल में क्रिप्टोकोकल संक्रमण के जोखिमों की पहचान करना था।
भारत में क्रिप्टोकोकल मेनिनजाइटिस एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों में सबसे आम आक्रामक फंगल संक्रमणों में से एक है। अध्ययन में सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (सीएसएफ), रक्त और ब्रोंकोएल्वियोलर लैवेज (बीएएल) द्रव सहित 500 नैदानिक (क्लीनिकल) नमूने एकत्र किए गए।
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नमूनों का इंडिया इंक तैयारी, सबौरॉड डेक्सट्रोज अगर पर कल्चर, केओएच तैयारी, ग्राम स्टेन और यूरीएज परीक्षण किया गया। इसके साथ ही, एचआईवी स्थिति और अन्य संबंधित बीमारियों का नैदानिक डेटा भी दर्ज किया गया।
अध्ययन में माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. रीना सचान, असिस्टेंट प्रो. अंजली वर्मा, जेआर डॉ. प्रतिभा वर्मा व न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश सोनकर प्रमुख रूप से शामिल रहे। यह अध्ययन फरवरी 2026 में डेंटल एंड मेडिकल प्रॉब्लम में प्रकाशित हुआ।
संक्रमण के प्रमुख जोखिम कारक
अध्ययन में क्रिप्टोकोकल संक्रमण से प्रभावित मरीजों की औसत आयु 36 वर्ष पाई गई। पुरुषों में यह संक्रमण अधिक देखा गया। पुरुष-महिला अनुपात 2.3:1 रहा।
नैदानिक विधियां और प्रजाति की पहचान
जांच किए गए 37 सकारात्मक मामलों में से अधिकांश (71 फीसदी) सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (सीएसएफ) से थे। क्रिप्टोकोकल नियोफॉर्मन्स प्रमुख प्रजाति थी, जो 86.8 फीसदी मामलों में पाई गई।
इंडिया इंक तैयारी ने 35 मामलों (94.6 फीसदी) में कैप्सूल युक्त खमीर कोशिकाओं को दर्शाया। केओएच वेट माउंट परीक्षण सभी 37 मामलों में सकारात्मक पाया गया। कल्चर परीक्षण में 34 मामलों (91.9 फीसदी) में वृद्धि देखी गई।
शीघ्र निदान और बचाव के उपाय
क्रिप्टोकोकल कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों में मेनिनजाइटिस का एक महत्वपूर्ण कारण बना हुआ है। ऐसे में कल्चर की जांच अगर समय रहते हो जाए तो मरीज का समय पर एंटी फंगल उपचार शुरू किया जा सकता है। एचआईवी पॉजिटिव और मधुमेह के रोगियों सहित अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित रोगियों को अपने कल्चर की जांच नियमित करानी चाहिए।
क्या है क्रिप्टोकोकल संक्रमण
क्रिप्टोकोकल संक्रमण एक गंभीर फंगल बीमारी है। जो क्रिप्टोकोकस नामक कवक के बीजाणु के हवा के जरिये शरीर के अंदर पहुंचने पर होती है।
जिन मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें क्रिप्टोकोकल संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे में एचआईवी पॉजिटिव, कैंसर, मधुमेह रोगियों को अपने कल्चर की जांच नियमित करानी चाहिए, ताकि संक्रमण का उपचार समय पर किया जा सके। - डॉ. कमलेश सोनकर, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।
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एमएलएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलाॅजी व न्यूरोलॉजी की ओर से दिसंबर 2024 यह अध्ययन शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के तृतीयक देखभाल अस्पताल में क्रिप्टोकोकल संक्रमण के जोखिमों की पहचान करना था।
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भारत में क्रिप्टोकोकल मेनिनजाइटिस एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों में सबसे आम आक्रामक फंगल संक्रमणों में से एक है। अध्ययन में सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (सीएसएफ), रक्त और ब्रोंकोएल्वियोलर लैवेज (बीएएल) द्रव सहित 500 नैदानिक (क्लीनिकल) नमूने एकत्र किए गए।
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नमूनों का इंडिया इंक तैयारी, सबौरॉड डेक्सट्रोज अगर पर कल्चर, केओएच तैयारी, ग्राम स्टेन और यूरीएज परीक्षण किया गया। इसके साथ ही, एचआईवी स्थिति और अन्य संबंधित बीमारियों का नैदानिक डेटा भी दर्ज किया गया।
अध्ययन में माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्ष डॉ. रीना सचान, असिस्टेंट प्रो. अंजली वर्मा, जेआर डॉ. प्रतिभा वर्मा व न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश सोनकर प्रमुख रूप से शामिल रहे। यह अध्ययन फरवरी 2026 में डेंटल एंड मेडिकल प्रॉब्लम में प्रकाशित हुआ।
संक्रमण के प्रमुख जोखिम कारक
अध्ययन में क्रिप्टोकोकल संक्रमण से प्रभावित मरीजों की औसत आयु 36 वर्ष पाई गई। पुरुषों में यह संक्रमण अधिक देखा गया। पुरुष-महिला अनुपात 2.3:1 रहा।
नैदानिक विधियां और प्रजाति की पहचान
जांच किए गए 37 सकारात्मक मामलों में से अधिकांश (71 फीसदी) सेरेब्रोस्पाइनल द्रव (सीएसएफ) से थे। क्रिप्टोकोकल नियोफॉर्मन्स प्रमुख प्रजाति थी, जो 86.8 फीसदी मामलों में पाई गई।
इंडिया इंक तैयारी ने 35 मामलों (94.6 फीसदी) में कैप्सूल युक्त खमीर कोशिकाओं को दर्शाया। केओएच वेट माउंट परीक्षण सभी 37 मामलों में सकारात्मक पाया गया। कल्चर परीक्षण में 34 मामलों (91.9 फीसदी) में वृद्धि देखी गई।
शीघ्र निदान और बचाव के उपाय
क्रिप्टोकोकल कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों में मेनिनजाइटिस का एक महत्वपूर्ण कारण बना हुआ है। ऐसे में कल्चर की जांच अगर समय रहते हो जाए तो मरीज का समय पर एंटी फंगल उपचार शुरू किया जा सकता है। एचआईवी पॉजिटिव और मधुमेह के रोगियों सहित अन्य गंभीर बीमारी से ग्रसित रोगियों को अपने कल्चर की जांच नियमित करानी चाहिए।
क्या है क्रिप्टोकोकल संक्रमण
क्रिप्टोकोकल संक्रमण एक गंभीर फंगल बीमारी है। जो क्रिप्टोकोकस नामक कवक के बीजाणु के हवा के जरिये शरीर के अंदर पहुंचने पर होती है।
जिन मरीजों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें क्रिप्टोकोकल संक्रमण का खतरा बना रहता है। ऐसे में एचआईवी पॉजिटिव, कैंसर, मधुमेह रोगियों को अपने कल्चर की जांच नियमित करानी चाहिए, ताकि संक्रमण का उपचार समय पर किया जा सके। - डॉ. कमलेश सोनकर, विभागाध्यक्ष, न्यूरोलॉजी विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।