आदेश : सरेराह अपहरण के बाद दुष्कर्म के दोषी को कठोर कारावास, बंदी प्रत्यक्षाकरण याचिका पर बरामद हुई थी पीड़िता
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जिला न्यायालय ने सरेराह अपहरण के बाद दुष्कर्म के दोषी को आठ साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। पीड़िता हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल होने के बाद बरामद हुई थी। विचारण अपर सत्र न्यायाधीश सुशील कुमारी की अदालत में हुआ।
मामला प्रयागराज के घूरपुर थाना क्षेत्र का है। अभियोजन की कहानी के मुताबिक वर्ष 2018 में पीड़िता बीटीसी की छात्रा थी। मां के साथ प्रयागराज शहर में स्थित कॉलेज से लौटते वक्त अमेठी निवासी मो. मकबूल अहमद और उसके भाई महफूज ने वादी की बेटी का अपहरण कर लिया था। आरोपी का पिता घूरपुर में ही लाइनमैन के रूप में तैनात था। राजनीतिक दबाव में पुलिस वादी की एफआईआर दर्ज नहीं कर रही थी।
पीड़िता के पिता ने उच्च न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की तब उसकी बेटी की बरामदगी हुई और कोर्ट के समक्ष पीड़िता ने आपबीती सुनाई, जिसके बाद घूरपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर विवेचना के बाद न्यायालय में मकबूल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
जनपद न्यायालय में महिलाओं और पॉक्सो के नोडल अधिकारी व जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि विचारण के दौरान अभियोजन ने सात गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले को साबित किया। मामले के विचारण के बाद अपर सत्र न्यायाधीश सुशील कुमारी ने मकबूल को दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए आठ साल के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुना दी।