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जवाहर पंडित हत्याकांड के विवेचक रहे रिटायर्ड डीएसपी पर मुकदमा
Mon, 05 Oct 2020 07:47 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 05 Oct 2020 07:47 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बहुचर्चित जवाहर हत्याकांड के मामले में विवेचना के दौरान लापरवाही के आरोप में विवेचक रहे रिटायर्ड डिप्टी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा पर मुकदमा दर्ज किया गया है। सीबीसीआईडी इंस्पेक्टर की तहरीर पर सिविल लाइंस थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। इसमें न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की गई। मामले की अब सीबीसीआईडी ही विवेचना करेगी।
रिपोर्ट सीबीसीआईडी प्रयागराज के इंस्पेक्टर उमाशंकर त्रिपाठी की तहरीर पर दर्ज की गई है। इसमें बताया गया है कि रिटायर्ड डिप्टी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा फरवरी 2000 में सीबीसीआईडी वाराणसी में निरीक्षक के पद पर तैनात थे। उन्होंने उदयभान करवरिया व अन्य पर हत्या, हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में दर्ज मामले की विवेचना भी की थी। इस दौरान उन्होंने लखनऊ जेल में निरुद्ध आरोपी मायाशंकर का बयान दर्ज किया था।
तहरीर में यह भी बताया गया है कि न्यायालय के अनुसार उपरोक्त बयान झूठा व मनगढ़ंत था, जिसे विवेचक ने अभियुक्तों को फायदा पहुंचाने व पीड़ित पर प्रतिकूल प्रभाव पहुंचाने की नीयत से विवेचना में न सिर्फ दर्ज किया, बल्कि इसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत भी किया, जोकि आईपीसी की धारा 166ए (बी) व 218 के तहत अपराध है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिटायर्ड डीएसपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी की ओर से नियुक्त विवेचक ही करेंगे।
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रिपोर्ट सीबीसीआईडी प्रयागराज के इंस्पेक्टर उमाशंकर त्रिपाठी की तहरीर पर दर्ज की गई है। इसमें बताया गया है कि रिटायर्ड डिप्टी एसपी प्रदीप कुमार वर्मा फरवरी 2000 में सीबीसीआईडी वाराणसी में निरीक्षक के पद पर तैनात थे। उन्होंने उदयभान करवरिया व अन्य पर हत्या, हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में दर्ज मामले की विवेचना भी की थी। इस दौरान उन्होंने लखनऊ जेल में निरुद्ध आरोपी मायाशंकर का बयान दर्ज किया था।
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तहरीर में यह भी बताया गया है कि न्यायालय के अनुसार उपरोक्त बयान झूठा व मनगढ़ंत था, जिसे विवेचक ने अभियुक्तों को फायदा पहुंचाने व पीड़ित पर प्रतिकूल प्रभाव पहुंचाने की नीयत से विवेचना में न सिर्फ दर्ज किया, बल्कि इसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत भी किया, जोकि आईपीसी की धारा 166ए (बी) व 218 के तहत अपराध है। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिटायर्ड डीएसपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी की ओर से नियुक्त विवेचक ही करेंगे।
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