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न्यायिक सेवा में दिव्यांगों को आरक्षण पर जवाब तलब
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Respondents are asked to answer on reservation
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न्यायिक सेवा में दिव्यांगाें को आरक्षण पर जवाब तलब
शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की न्यायिक सेवा में शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों (दिव्यांगों) का कोटा निर्धारित करने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले के सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। याचीगण को कोई अंतरिम राहत देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया है कि याचिका में मांगी गई अंतिम राहत को अंतरिम राहत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अंतरिम अर्जी खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति आरआर अग्रवाल की खंडपीठ ने आलोक कुमार चौरसिया कि याचिका पर दिया है । याचिका में कहा गया था कि न्यायिक सेवा में दिव्यांगों के लिए आरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। अन्य विभागों की तरह यहां भी उनके लिए कोटा निर्धारित किया जाए। कोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को विचारणीय माना है। सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा है कि याचिका स्वीकार होने पर जो राहत दी जा सकती है, वही राहत अंतरिम रूप से नहीं दी जा सकती।
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शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए कोटा निर्धारित करने की मांग
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की न्यायिक सेवा में शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों (दिव्यांगों) का कोटा निर्धारित करने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले के सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया है। याचीगण को कोई अंतरिम राहत देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया है कि याचिका में मांगी गई अंतिम राहत को अंतरिम राहत के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने अंतरिम अर्जी खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति आरआर अग्रवाल की खंडपीठ ने आलोक कुमार चौरसिया कि याचिका पर दिया है । याचिका में कहा गया था कि न्यायिक सेवा में दिव्यांगों के लिए आरक्षण की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। अन्य विभागों की तरह यहां भी उनके लिए कोटा निर्धारित किया जाए। कोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को विचारणीय माना है। सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा है कि याचिका स्वीकार होने पर जो राहत दी जा सकती है, वही राहत अंतरिम रूप से नहीं दी जा सकती।
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