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कोर्ट की अनुमति से जेल बदलने के आदेश का पालन जरूरी

Fri, 15 Sep 2017 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Fri, 15 Sep 2017 01:56 AM IST
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Requiring to follow the orders of the prison with the permission of the court
bombay highcourt
हाईकोर्ट ने कहा कि विचाराधीन बंदियों की जेल संबंधित अदालत की मंजूरी के बाद ही बदलें। इस आदेश का पालन जरूरी है। मौजूदा समय में सरकार इस आदेश का पालन किए बिना ही तमाम बंदियों की जेल बदल दे रही है, जोकि अनुचित है। कोर्ट कहा कि आदेश का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। सुप्रीमकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र राज्य के केस में सर्वोच्च अदालत ने बिना संबंधित न्यायालय की अनुमति के जेल बदलने पर रोक लगाई है। इस आदेश के आलोक में हाईकोर्ट ने एक दर्जन से अधिक विचाराधीन बंदियों की जेल बदलने के आदेश पर रोक लगा दी है। सभी को वापस उनकी पूर्व की जेलों में भेजने का निर्देश दिया है। सरकार को छूट दी है कि संबंधित न्यायालय की अनुमति लेकर बंदियों को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है।
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न्यायमूर्ति वीके नारायण और न्यायमूर्ति शशिकांत की पीठ ने गौतमबुद्धनगर से हमीरपुर जेल स्थानांतरित किए गए सुंदर भाटी और 13 अन्य बंदियों की याचिकाओं पर यह आदेश दिया। सुप्रीमकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि बंदियों को दूरदराज की जेलों में स्थानांतरित करने से वह खुद का बचाव करने के अधिकार से तो वंचित होते ही हैं अपने समाज और लोगों से कट जाते हैं। इसलिए अनावश्यक रूप से जेल से स्थानंातरित करना सही नहीं है। यदि ऐसा करना आवश्यक है तो संबंधित न्यायालय की अनुमति से ही यह किया जाना चाहिए।
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