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इलाहाबाद में जजेज कालोनी की जमीन पर अवैध निर्माणा हटाना वैधः इलाहाबाद हाईकोर्ट

Thu, 17 Sep 2020 06:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 17 Sep 2020 06:40 PM IST
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Removal of illegal construction on the land of Judges Colony is valid: Allahabad High Court
prayagraj news - फोटो : prayagraj
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जजों की कालोनी के लिए प्रस्तावित भूमि पर किए गए अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण को सही करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 19 क्लाइव रोड स्थित भूमि के एक हिस्से पर याची का कोई विधिक अधिकार नहीं है। याचिका में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को चुनौती दी गई थी। 
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यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकान्त गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने शिव कुमार पाण्डेय की याचिका पर दिया है। 

कोर्ट ने कहा है कि नजूल भूमि 19 क्लाइव रोड को 25 जुलाई 1949 को राज्य सरकार ने अमृत बाजार पत्रिका कंपनी को 50 साल की लीज पर दिया था। लीज शर्तो का उल्लंघन कर कंपनी ने भूमि यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया को लोन के एवज में बंधक रख दी। कंपनी ने लोन अदा नहीं किया तो बैक ने दावा कर जमीन अपने नाम कर ली।इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने बंधन को लीज शर्तो के विपरीत होने के कारण अवैध करार दिया। इाके बाद जमीन राज्य सरकार को वापस मिल गई। अब इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट को न्यायाधीशों के आवासीय भवन निर्माण के लिए दे दिया गया है।
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याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची के पिता अमृत बाजार पत्रिका में कर्मचारी थे ।1955-56में इसी जमीन में 100 वर्ग गज जमीन उनको रहने के लिए दी गई थी ।जिस पर वह टीनशेड के दो कमरों में निवास कर रहा था।प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने बिना सुनवाई का मौका दिए उसके आवास को अवैध बताते हुए ध्वस्त कर दिया है। याचिका में निर्माण वापसी सहित मुआवजा दिलाए जाने की मांग की गई थी। 
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कोर्ट ने कहा कि लीज कंपनी के नाम थी,याची के नहीं।कंपनी लीज शर्तों के विपरीत याची को जमीन पर अधिकार नहीं दे सकती थी ।वह लीज की जमीन पर तीसरे पक्ष का हित सृजित नहीं कर सकती थी।जमीन सरकार ने वापस ले ली है। जिसे कोर्ट ने वैध माना है। इसलिए ध्वस्तीकरण कार्यवाही विधि विरुद्ध नहीं है।
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