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Prayagraj News: रामलीला ने दी अभिनेत्री रति को अभिनय की दिशा
Sun, 18 Oct 2026 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:32 AM IST
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कैकई-मंथरा संवाद का मंचन करती रति श्रीवास्तव। स्वयं
- फोटो : Self
मुंबई में अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बना रहीं अभिनेत्री रति श्रीवास्तव (26) के लिए प्रयागराज की रामलीला महज एक मंचन नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है। टीवी सीरियल, वेब सीरीज और फिल्मों में काम करने के बावजूद उनका अपनी जड़ों से जुड़ाव बरकरार है।
यही वजह है कि वह हर साल मुंबई से प्रयागराज आती हैं और पथरचट्टी रामलीला में हिस्सा लेती हैं। 14 वर्षों से रामलीला से जुड़ी रति छह वर्षों से माता कैकेयी की भूमिका निभा रही हैं। कीडगंज निवासी रति पिछले सात वर्षों से मुंबई में रहकर हिंदी मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं।
उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर, शिवशक्ति, सुमन इंदौरी, पति अनाड़ी और मन्नत जैसे टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है। उनकी अभिनय यात्रा की शुरुआत प्रयागराज से हुई। उन्होंने रामलीला के मंच से अभिनय सीखा और शहर में थिएटर भी किया। वह शास्त्रीय नृत्यांगना भी हैं और प्रयाग संगीत समिति से कथक का प्रशिक्षण ले चुकी हैं।
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रति कहती हैं कि रामलीला के मंच ने उनकी अभिनय यात्रा को दिशा दी है। इसलिए मुंबई में काम करने के बावजूद वह इस मंच से अपना रिश्ता नहीं तोड़ना चाहतीं। रामलीला उनके लिए अपनी संस्कृति, आस्था और प्रयागराज से जुड़े रहने का माध्यम है।
भावनाओं से भरा है कैकेयी का किरदार
रति ने कहा कि कैकेयी को केवल नकारात्मक पात्र के रूप में देखना उचित नहीं है। इस किरदार में मां की ममता, पत्नी का कर्तव्य, प्रेम, त्याग और बलिदान जैसे कई भाव समाहित हैं। दशरथ के साथ संवाद और भरत के माता का परित्याग किए जाने का प्रसंग कलाकार के लिए भावनात्मक चुनौती पेश करता है।
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यही वजह है कि वह हर साल मुंबई से प्रयागराज आती हैं और पथरचट्टी रामलीला में हिस्सा लेती हैं। 14 वर्षों से रामलीला से जुड़ी रति छह वर्षों से माता कैकेयी की भूमिका निभा रही हैं। कीडगंज निवासी रति पिछले सात वर्षों से मुंबई में रहकर हिंदी मनोरंजन जगत में सक्रिय हैं।
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उन्होंने अहिल्याबाई होल्कर, शिवशक्ति, सुमन इंदौरी, पति अनाड़ी और मन्नत जैसे टीवी धारावाहिकों में अभिनय किया है। उनकी अभिनय यात्रा की शुरुआत प्रयागराज से हुई। उन्होंने रामलीला के मंच से अभिनय सीखा और शहर में थिएटर भी किया। वह शास्त्रीय नृत्यांगना भी हैं और प्रयाग संगीत समिति से कथक का प्रशिक्षण ले चुकी हैं।
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रति कहती हैं कि रामलीला के मंच ने उनकी अभिनय यात्रा को दिशा दी है। इसलिए मुंबई में काम करने के बावजूद वह इस मंच से अपना रिश्ता नहीं तोड़ना चाहतीं। रामलीला उनके लिए अपनी संस्कृति, आस्था और प्रयागराज से जुड़े रहने का माध्यम है।
भावनाओं से भरा है कैकेयी का किरदार
रति ने कहा कि कैकेयी को केवल नकारात्मक पात्र के रूप में देखना उचित नहीं है। इस किरदार में मां की ममता, पत्नी का कर्तव्य, प्रेम, त्याग और बलिदान जैसे कई भाव समाहित हैं। दशरथ के साथ संवाद और भरत के माता का परित्याग किए जाने का प्रसंग कलाकार के लिए भावनात्मक चुनौती पेश करता है।