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रामजन्म भूमि पर आतंकी हमले का मामला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 13 Apr 2016 01:20 AM IST
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मुकदमा
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रामजन्म भूमि पर हुए आतंकी हमले के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस प्रकरण पर मंगलवार को फैसला सुनाया जाना था मगर उससे पहले अदालत को मुकदमे का निर्णय करने के लिए कुछ अहम गवाहों का दोबारा परीक्षण करने और दो नए गवाहों के साक्ष्य की आवश्यकता महसूस हुई, जिसकी वजह से फैसला टाल दिया गया।
सुनवाई कर रही अदालत ने अपने विधिक अधिकाराें का प्रयोग करते हुए गवाही दे चुके तीन गवाहों को पुन: बयान दर्ज कराने के लिए तलब कर लिया है। इसके अलावा कोर्ट ने उन दो गवाहों को भी नोटिस जारी कर तलब किया है, जिनकी गवाही मुकदमे के लिए अहम है। मगर अभियोजन ने इनको गवाह के तौर पर पेश नहीं किया था। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एके गुप्ता ने जेल परिसर नैनी में हुई सुनवाई के बाद दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। पुन: गवाही के आदेश से फैसला आने में अब देरी हो सकती है।
एडीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी थी और मंगलवार को फैसला सुनाया जाना था मगर कोर्ट ने कुछ और तथ्यों का समावेश करने केे लिए सीआरपीसी की धारा 311 के तहत गवाही दे चुके पुलिस उपाधीक्षक अजीत कुमार सिन्हा, जो मामले में अन्तिम विवेचक थे और एसओ केएन दुबे, सायर अली को पुन: साक्ष्य के लिए तलब किया है। घटना में जिस वाहन को आतंकियों ने विस्फोट करने के लिए इस्तेमाल किया है उसके वाहन स्वामी सैयद रेहान अहमद और जनता के गवाह अलीम को गवाही के लिए समन जारी किया है ।
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सीआरपीसी की धारा 311 में अदालत को विशेष शक्ति प्राप्त होती है कि वह किसी गवाह को पुन: परीक्षा के लिए बुला सकती है और यदि साक्ष्य आवश्यक है तो वह अन्य गवाहाें को समन कर सकती है। इसका प्रयोजन न्याय की विफलता को रोकना और उचित निर्णय करना होना है।
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सुनवाई कर रही अदालत ने अपने विधिक अधिकाराें का प्रयोग करते हुए गवाही दे चुके तीन गवाहों को पुन: बयान दर्ज कराने के लिए तलब कर लिया है। इसके अलावा कोर्ट ने उन दो गवाहों को भी नोटिस जारी कर तलब किया है, जिनकी गवाही मुकदमे के लिए अहम है। मगर अभियोजन ने इनको गवाह के तौर पर पेश नहीं किया था। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एके गुप्ता ने जेल परिसर नैनी में हुई सुनवाई के बाद दिया है। मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होगी। पुन: गवाही के आदेश से फैसला आने में अब देरी हो सकती है।
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एडीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी थी और मंगलवार को फैसला सुनाया जाना था मगर कोर्ट ने कुछ और तथ्यों का समावेश करने केे लिए सीआरपीसी की धारा 311 के तहत गवाही दे चुके पुलिस उपाधीक्षक अजीत कुमार सिन्हा, जो मामले में अन्तिम विवेचक थे और एसओ केएन दुबे, सायर अली को पुन: साक्ष्य के लिए तलब किया है। घटना में जिस वाहन को आतंकियों ने विस्फोट करने के लिए इस्तेमाल किया है उसके वाहन स्वामी सैयद रेहान अहमद और जनता के गवाह अलीम को गवाही के लिए समन जारी किया है ।
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सीआरपीसी की धारा 311 में अदालत को विशेष शक्ति प्राप्त होती है कि वह किसी गवाह को पुन: परीक्षा के लिए बुला सकती है और यदि साक्ष्य आवश्यक है तो वह अन्य गवाहाें को समन कर सकती है। इसका प्रयोजन न्याय की विफलता को रोकना और उचित निर्णय करना होना है।