राम मंदिर : माथे पर राम नाम छपवाने की मची होड़, श्रृंगवेरपुर घाट पर रोज पहुंच रहे सैकड़ों भक्त
अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के नवविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के उत्सव में पूरा देश जहां राममय हो गया है, वहीं निषादराज और भगवान राम की मिलन के नगरी श्रृंगवेरपुर इससे अछूती नहीं है। जिस घाट से केवट ने भगवान को गंगा पार कराया था उस घाट पर स्नान करने वालों की संख्या बढ़ गई है।
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अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के नवविग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के उत्सव में पूरा देश जहां राममय हो गया है, वहीं निषादराज और भगवान राम की मिलन के नगरी श्रृंगवेरपुर इससे अछूती नहीं है। जिस घाट से केवट ने भगवान को गंगा पार कराया था उस घाट पर स्नान करने वालों की संख्या बढ़ गई है। साथ ही माथे पर राम नाम का प्रतीक चिन्ह छपवाने की होड़ मची है। रोजाना सैकड़ों भक्त स्नान करने के बाद माथे पर सुगंधित चंदन का लेप लगवाने के बाद राम नाम अंकित चिन्ह रोली में लगाकर माथे पर छपवा रहे हैं।
त्रेतायुग मे भगवान राम ने श्रृंग्वेरपुर से ही गंगा पार किया था। निषाद राज केवट ने अपनी नाव से प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मणजी को पार उतारा था। इस स्थान पर आज भव्य राम-केवट पार्क बनाया जा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले इस पार्क की शोभा देखते ही बन रही है। निर्माणाधीन अवस्था में स्थित इस पार्क को गुलाबी पत्थरों से बनाया जा रहा है।
घाट पर करीब 65 साल से पुरोहित का कार्य करने वाले शांता प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं इस गंगा घाट का विशेष महत्व है। यहां पर भगवान ने गंगा उस पार किया था और यहीं से उन्होंने सुमंत को रथ समेत अयोध्या वापस जाने के लिए कहा था।
घाट पर स्नान करने के बाद माथे पर और सीने में राम नाम छपवाने वालों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। यह धर्म का नशा है जब चढ़ जाता है तो फिर उतरता नहीं है। पूरा देश राममय है। यह सौभाग्य की बात है कि हम लोग रामलला को विराजमान होते हुए देख रहे हैं।