प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विवि : राज्य विवि की 120 छात्रों से हुई थी शुरुआत, अब 14 विभाग
सिविल लाइंस स्थित छोटे से परिसर से शुरू होने वाला प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय सात वर्षों में बड़ा आकार ले चुका है। इस दौरान छात्र-छात्राओं की संख्या भी करीब सात गुना हो गई है।
राज्य विश्वविद्यालय की शुरुआत सिविल लाइंस स्थित सीपीआई परिसर से हुई थी, जो अब नैनी स्थित सरस्वती हाईटेक परिसर में जा चुका है। 120 एकड़ में फैले विश्वविद्यालय परिसर में मुख्य एवं शैक्षणिक समेत 13 भवनों का निर्माण हो चुका है। इनका उपयोग भी शुरू हो चुका है। कई अन्य भी निर्माणाधीन हैं। 2019 में यह राज्य विश्वविद्यालय से प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय हो गया।
विश्वविद्यालय में कला वर्ग के छह विषयों से शिक्षण कार्य की शुरुआत हुई, जिनमें 120 विद्यार्थियाें ने दाखिला लिया था। वहीं अब विभागों की संख्या 14 हो गई है और 800 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि राज्य सरकार की मदद से 13 रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। साथ ही 24 विषयों के पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश की प्रक्रिया चालू है।
विश्वविद्यालय के अलावा राजकीय एवं सहायता प्राप्त कॉलेजों में भी पीएचडी कोर्स की अनुमति दी गई है।विश्वविद्यालय परिसर पूरी तरह से वाईफाई सुविधा से लैस है। उद्यमिता के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर का भी निर्माण कराया जा रहा है। चीफ प्रॉक्टर डॉ.अविनाश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि परिसर में अनुशासन बनाए रखने एवं विश्वविद्यालय के साथ कॉलेजों में भी नकल विहीन परीक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसका प्रभाव भी दिखने लगा है।
आगामी सत्र से इन पाठ्यक्रमों होगी पढ़ाई
विश्वविद्यालय में आगामी सत्र से विधि समेत अन्य विषयों में पढ़ाई शुरू होने जा रही है। विधि, कंप्यूटर विज्ञान, कृषि विज्ञान एवं फार्मेसी में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों दाखिले की प्रक्रिया शुरू है।
2.5 लाख से 4.5 लाख हो गई है कॉलेजों में छात्रों की संख्याराज्य विश्वविद्यालय से प्रयागराज के अलावा मंडल के अन्य जिलों प्रतापगढ़, कौशाम्बी एवं फतेहपुर के इन दिनों 653 कालेज संबद्ध हैं। वहीं 2016 में 585 कॉलेज संबद्ध थे। इन काॅलेजों में विद्यार्थियों की संख्या भी 2.5 लाख से 4.5 लाख हो गई है।
विवि की खास बातें
राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू
अनुसंधान गतिविधियों के लिए अनुसंधान एवं परामर्श नीति
शोध एवं अनुसंधान के लिए 10 करोड़ रुपये की अक्षय निधि
राज्य सरकार से अनुदानित 13 शोध परियोजनाएं संचालित
एक विभाग को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा
अब तक 100 शोध पत्र एवं 20 पुस्तकों का प्रकाशन
अगले वर्ष से छात्रावास एवं अतिथि गृह शुरू हो जाएगा
खेल मैदान, लाइब्रेरी, आईटी सेंटर का निर्माण जारी
आईटी सुविधाओं के विकास के लिए 10 कराेड़ रुपये की निधि
56 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ अनुबंध
अंकपत्र, प्रमाणपत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
विवि ने 10 वर्षीय विजन दस्तावेज तैयार किया
विद्यार्थियों को पठन-पाठन का माहौल देने के साथ नकल विहीन परीक्षा पर फोकस है। इसके लिए तय मानकों को कठोरता से लागू किया गया है। विश्वविद्यालय और कॉॅलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति सफलतापूर्वक लागू है। छात्र-छात्राओं के बहु विकास एवं बहु प्रवेश की सुविधा भी एकेडमिक क्रेडिट बैंक के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है। विश्वविद्यालय का पीआरएसयू उच्च गुणवत्ता के अनुसंधान एवं नवाचार के लिए प्रतिबद्ध है। जल्द ही नैक एवं एनआईआरएफ मूल्यांकन कराया जाएगा। - प्रोफेसर अखिलेश कुमार सिंह, कुलपति।