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आरोप और ज्ञापन के आधार पर जनहित याचिका स्वीकार नहीं : हाईकोर्ट
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के चौरी-चौरा स्थित 147-बी रेलवे ओवरब्रिज को ‘एल’ मॉडल के बजाय ‘वाई’ मॉडल में बनाने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि याची कोई ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। केवल आरोपों, ज्ञापनों की प्रतियां और अखबारों की कतरनें जनहित याचिका पर विचार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकती हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने काली शंकर यदुवंशी एवं एक अन्य की जनहित याचिका पर दिया।
याचिका में राज्य सरकार और अन्य अधिकारियों को ओवरब्रिज के मॉडल में बदलाव करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचियों ने अपने दावों के समर्थन में कोई ऐसा ठोस दस्तावेज या सामग्री प्रस्तुत नहीं की, जिससे अदालत स्वतंत्र रूप से किसी निष्कर्ष पर पहुंच सके।
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कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त और विश्वसनीय सामग्री के अभाव में इस प्रकार की जनहित याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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कोर्ट ने कहा कि याची कोई ठोस और स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। केवल आरोपों, ज्ञापनों की प्रतियां और अखबारों की कतरनें जनहित याचिका पर विचार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकती हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने काली शंकर यदुवंशी एवं एक अन्य की जनहित याचिका पर दिया।
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याचिका में राज्य सरकार और अन्य अधिकारियों को ओवरब्रिज के मॉडल में बदलाव करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचियों ने अपने दावों के समर्थन में कोई ऐसा ठोस दस्तावेज या सामग्री प्रस्तुत नहीं की, जिससे अदालत स्वतंत्र रूप से किसी निष्कर्ष पर पहुंच सके।
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कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त और विश्वसनीय सामग्री के अभाव में इस प्रकार की जनहित याचिकाओं पर विचार नहीं किया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।