{"_id":"676267c3743b3b03e00a13c5","slug":"public-interest-litigation-demanding-investigation-of-sambhal-violence-by-an-independent-agency-rejected-2024-12-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : संभल हिंसा की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : संभल हिंसा की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज
Wed, 18 Dec 2024 11:42 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 18 Dec 2024 11:42 AM IST
सार
याचिका में संभल हिंसा की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने, घटना में मरने वालों की संख्या और इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल में मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने व हाईकोर्ट से इसकी निगरानी करने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है। कहा कि सरकार पहले ही सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग गठित कर चुकी है। ऐसे में इस मामले में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट की जनहित याचिका पर दिया।
विज्ञापन
याचिका में संभल हिंसा की किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने, घटना में मरने वालों की संख्या और इस मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। साथ ही दर्ज मुकदमे को वेबसाइट पर अपलोड करने व संभल के डीएम-एसपी, कमिश्नर सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को पद से हटाने और उन पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता एसएफए नकवी ने दलील दी कि मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की जरूरत है। एकत्र किए गए साक्ष्य नष्ट किए जा सकते हैं। वहीं, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और शासकीय अधिवक्ता एक संड दलील दी कि राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग गठित कर दिया है। आयोग की ओर से एकत्र किए गए साक्ष्य जिला जज की देखरेख में रहेंगे। ऐसे में उनके नष्ट होने की आशंका जताना बेबुनियाद है। यह भी बताया मामले की प्राथमिकी पहले ही वेबसाइट पर लोड कर दी गई है।
विज्ञापन
न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद जनहित याचिका खारिज कर दिया। न्यायालय ने कहा कि याची को इस बात की छूट है कि वह कोई नया तथ्य सामने आने पर नई याचिका दाखिल कर सकता है।