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प्रोफेसर शाहिद को नहीं मिली जमानत, विदेशी अधिनियम के तहत भेजा गया जेल
Wed, 22 Apr 2020 12:53 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 22 Apr 2020 12:53 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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इविवि के प्रो. मो. शाहिद को मंगलवार को शिवकुटी पुलिस ने मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेश किया। उनके खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा में भी मुकदमा दर्ज होने की वजह से जमानत नहीं मिल पाई। रिमांड कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। प्रोफेसर की ओर से प्रस्तुत जमानत अर्जी पर अंतिम बहस बाकी है, जमानत अर्जी विचाराधीन है।
प्रोफेसर पर शिवकुटी और शाहगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज है। शिवकुटी पुलिस ने प्रोफेसर को सोमवार की रात गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ राष्ट्रीय आपदा अधिनियम, महामारी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन, थाना शाहगंज में इनके खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 एबीसी के तहत भी मुकदमा दर्ज है।
विदेशी अधिनियम की धारा में 8 साल की सजा का प्रावधान है, जिसके कारण उच्चतम न्यायालय के निर्देश सात साल से कम की सजा के प्रावधान का लाभ नहीं मिल सका। मंगलवार को रिमांड मजिस्ट्रेट मयंक त्रिपाठी के सामने प्रकरण की सुनवाई हुई।
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बचाव पक्ष की ओर से जमानत अर्जी पेश कर कई अधिवक्ताओं ने पक्ष प्रस्तुत कर कहा कि जमानत पर रिहा कर दिया जाए। वह जमानत की शर्तों का पालन करेंगे। अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध कर कहा गया कि उन पर लगाए गए आरोप में सात वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने जमानत अर्जी पर अंतिम बहस के लिए अवसर देते हुए अर्जी विचाराधीन रख दी है।
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प्रोफेसर पर शिवकुटी और शाहगंज थाने में प्राथमिकी दर्ज है। शिवकुटी पुलिस ने प्रोफेसर को सोमवार की रात गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ राष्ट्रीय आपदा अधिनियम, महामारी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। लेकिन, थाना शाहगंज में इनके खिलाफ विदेशी अधिनियम की धारा 14 एबीसी के तहत भी मुकदमा दर्ज है।
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विदेशी अधिनियम की धारा में 8 साल की सजा का प्रावधान है, जिसके कारण उच्चतम न्यायालय के निर्देश सात साल से कम की सजा के प्रावधान का लाभ नहीं मिल सका। मंगलवार को रिमांड मजिस्ट्रेट मयंक त्रिपाठी के सामने प्रकरण की सुनवाई हुई।
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बचाव पक्ष की ओर से जमानत अर्जी पेश कर कई अधिवक्ताओं ने पक्ष प्रस्तुत कर कहा कि जमानत पर रिहा कर दिया जाए। वह जमानत की शर्तों का पालन करेंगे। अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध कर कहा गया कि उन पर लगाए गए आरोप में सात वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने जमानत अर्जी पर अंतिम बहस के लिए अवसर देते हुए अर्जी विचाराधीन रख दी है।