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प्रो. कलबुर्गी की हत्या के विरोध में प्रतिरोध मार्च
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 06 Sep 2015 11:22 PM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। मशहूर कन्नड़ लेखक एवं साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता प्रो. कलबुर्गी की हत्या के विरोध में रविवार को शहर के कलाकर्मियों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, छात्र-नौजवानों सहित विभिन्न जनसंगठनों, कर्मचारी यूनियनों ने प्रतिरोध मार्च निकाला। मार्च चंद्रशेखर आजाद पार्क से शुरू होकर कर्नलगंज चौराहा, नेतराम चौराहा, कटरा, लक्ष्मी चौराहे से होते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पर स्थित शहीद लाल पद्मधर की प्रतिमा के सामने पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया।
सभा को संबोधित करते हुए जन संस्कृति मंच के अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने की बात करने वाले लोग आज देश को वैचारिक, सांस्कृतिक रूप से पीछे धकेलना चाहते हैं। ये लोग जो आज सत्ता पर काबिज हैं हमें पुरातन पंथी विचारों ओर समाज की ओर ले जाना चाहते हैं। उन्होंने इन शक्तियों के खिलाफ प्रतिरोध मार्च को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग आज संस्कृति के झंडाबरदार बन रहे हैं उनको खुद ही नहीं मालूम कि इस देश में अंधविश्वास के विरोध की एक प्रबल परंपरा रही है। सीटू नेता हरिश्चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आज जो लोग सत्ता में हैं और जिनकी रहनुमाई में प्रगतिशील बुद्धिजीवियों की हत्या की जा रही है।
सभा में प्रणवकृष्ण, सुधीर सिंह, अखिल विकल्प ने अपनी बात कही। इसके पूर्व मार्च का आरंभ वरिष्ठ कामरेड एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जियाउल हक ने अपने भाषण से किया। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. दूधनाथ सिंह ने की। संचालन इंश्योरेंस इंप्लाइज यूनियन के अविनाश मिश्र ने किया। कार्यक्रम में प्रो. लाल बहादुर वर्मा, प्रो. संतोष भदौरिया, हरिश्चंद पांडेय, ओडी सिंह, वरिष्ठ वकील रवि किरन जैन, रामजी राय, उर्मिला जैन, पद्मा सिंह, नीलम शंकर, झरना मालवीय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मार्च में प्रलेस जसम, जलेस, सीटू, एटक, एक्टू, मेडिकल वर्कर्स यूनियन, पीयूसीएल, एसएफआई, आइसा, एआईडीएसओ, इंकलाबी छात्र मोर्चा, दिशा छात्र संगठन, स्त्री मुक्ति संगठन, आजादी बचाओ आंदोलन, समानांतर, आरोही, दस्तक, इतिहासबोध आदि संगठन शामिल हुए।
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सभा को संबोधित करते हुए जन संस्कृति मंच के अध्यक्ष प्रो. राजेंद्र कुमार ने कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने की बात करने वाले लोग आज देश को वैचारिक, सांस्कृतिक रूप से पीछे धकेलना चाहते हैं। ये लोग जो आज सत्ता पर काबिज हैं हमें पुरातन पंथी विचारों ओर समाज की ओर ले जाना चाहते हैं। उन्होंने इन शक्तियों के खिलाफ प्रतिरोध मार्च को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग आज संस्कृति के झंडाबरदार बन रहे हैं उनको खुद ही नहीं मालूम कि इस देश में अंधविश्वास के विरोध की एक प्रबल परंपरा रही है। सीटू नेता हरिश्चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आज जो लोग सत्ता में हैं और जिनकी रहनुमाई में प्रगतिशील बुद्धिजीवियों की हत्या की जा रही है।
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सभा में प्रणवकृष्ण, सुधीर सिंह, अखिल विकल्प ने अपनी बात कही। इसके पूर्व मार्च का आरंभ वरिष्ठ कामरेड एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जियाउल हक ने अपने भाषण से किया। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. दूधनाथ सिंह ने की। संचालन इंश्योरेंस इंप्लाइज यूनियन के अविनाश मिश्र ने किया। कार्यक्रम में प्रो. लाल बहादुर वर्मा, प्रो. संतोष भदौरिया, हरिश्चंद पांडेय, ओडी सिंह, वरिष्ठ वकील रवि किरन जैन, रामजी राय, उर्मिला जैन, पद्मा सिंह, नीलम शंकर, झरना मालवीय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। मार्च में प्रलेस जसम, जलेस, सीटू, एटक, एक्टू, मेडिकल वर्कर्स यूनियन, पीयूसीएल, एसएफआई, आइसा, एआईडीएसओ, इंकलाबी छात्र मोर्चा, दिशा छात्र संगठन, स्त्री मुक्ति संगठन, आजादी बचाओ आंदोलन, समानांतर, आरोही, दस्तक, इतिहासबोध आदि संगठन शामिल हुए।
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