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प्रो. हांगलू के एक गलत निर्णय से डेढ़ करोड़ का झटका
Tue, 07 Jan 2020 01:07 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 07 Jan 2020 01:07 AM IST
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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के एक गलत निर्णय से इविवि प्रशासन को डेढ़ करोड़ रुपये का झटका लगा था। प्रो. हांगलू पर वित्तीय अनियमितता के जो आरोप लगे हैं, उनमें यह मामला भी शामिल है। मंत्रालय की ओर से गठित जांच कमेटी के दायरे में यह मामला भी आएगा।
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दअरसल, यूजीसी ने नियम बनाया था कि विश्वविद्यालयों में अगर शिक्षकों की कमी है तो नियमित नियुक्ति होने तक सेवानिवृत्त शिक्षकों से काम लिया जा सकता है। इसके लिए एक कमेटी बनाकर सेवानिवृत्त शिक्षकों का इंटरव्यू कराए जाने और उन्हें पुनर्नियुक्त किए जाने का प्रावधान है। प्रो. हागंलू के कुलपति का पद संभालने से पहले इविवि में 12 सेवानिवृत्त शिक्षकों को पुनर्नियुक्त किया गया था।
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इनमें ऑटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री भी शामिल थी।
प्रो. हांगलू ने कुलपति का पदभार संभालने के बाद जुलाई 2016 में इन सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों की पुनर्नियुक्ति निरस्त कर दी थी। इसके खिलाफ प्रो. शास्त्री समेत आठ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी थी। नवंबर 2016 में हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवा बहाली और उन्हें भुगतान करने का आदेश दिया लेकिन इविवि प्रशासन ने ऐसा नहीं किया और सेवानिवृत्त शिक्षकों की जगह अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति कर दी। इसके खिलाफ सेवानिवृत्त शिक्षकों ने 2017 में अवमानना याचिका दाखिल कर दी।
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हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रो. हांगलू को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया। हालांकि इससे पहले ही इविवि प्रशासन की ओर से सेवानिवृत्त शिक्षकों का भुगतान कर दिया गया। सेवानिवृत्त शिक्षकों को जुलाई 2016 से सितंबर 2017 तक के एरियर के रूप में तकरीबन एक करोड़ 28 लाख रुपये का भुगतान किया जबकि इस दौरान सेवानिवृत्त शिक्षकों ने क्लास नहीं ली। इसके साथ ही उनकी जगह नियुक्त गेस्ट फैकल्टी को अलग से भुगतान किया। इस तरह कुल डेढ़ करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।