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बयान से पलटे प्रो.हांगलू
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 12 May 2016 02:34 AM IST
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प्रोफेसर रतनलाल हांगलू
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी तथा मंत्रालय की ओर से ऑफलाइन के मुद्दे पर दबाव बनाए जाने के बयान से पीछे हट गए हैं। उनका कहना है कि बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया है। ऑफलाइन के मुद्दे पर मंत्रालय के पत्र की बाबत उन्होंने कहा कि यह नीतिगत फैसला है। मंत्रालय की ओर से इसकी जानकारी दी गई, जिसे लागू कर दिया गया है। बुधवार को मीडिया से उन्होंने इतना जरूर कहा कि स्थानीय नेताओं की ओर से बेवजह दबाव बनाया जा रहा है। इसमें भाजपा, सपा और कांग्र्रेस के अलावा संघ के लोग भी शामिल हैं। इस स्थिति में काम करना कठिन होगा।
ऑफलाइन के मुद्दे पर मंत्रालय के पत्र को लेकर कुलपति काफी नाराज रहे। मंगलवार को उन्होंने बयान दिया था कि मंत्रालय चाहे तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि इसी तरह से हस्तक्षेप करना है तो एमपी, एमएलए को ही कुलपति बना दें। इस बयान पर चौतरफा दबाव बढ़ने के बाद कुलपति बयान से पलट गए। उनका कहना है कि मंत्री और मंत्रालय की ओर से दबाव बनाए जाने का बयान उन्होंने नहीं दिया है। उनका यह कहना है कि स्मृति ईरानी और मंत्रालय की ओर से उन पर किसी तरह का दबाव भी नहीं डाला गया। हालांकि, स्थानीय नेता तथा सांसद, विधायक उनके निशाने पर बुधवार को भी रहे। कुलपति ने कहा कि आखिर सभी दल के नेता सांसद, विधायक छात्रों के साथ क्याें गए। उनका कहना है कि इसी तरह से दबाव बनाया जाएगा तो काम करना कठिन होगा।
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ऑफलाइन के मुद्दे पर मंत्रालय के पत्र को लेकर कुलपति काफी नाराज रहे। मंगलवार को उन्होंने बयान दिया था कि मंत्रालय चाहे तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा था कि इसी तरह से हस्तक्षेप करना है तो एमपी, एमएलए को ही कुलपति बना दें। इस बयान पर चौतरफा दबाव बढ़ने के बाद कुलपति बयान से पलट गए। उनका कहना है कि मंत्री और मंत्रालय की ओर से दबाव बनाए जाने का बयान उन्होंने नहीं दिया है। उनका यह कहना है कि स्मृति ईरानी और मंत्रालय की ओर से उन पर किसी तरह का दबाव भी नहीं डाला गया। हालांकि, स्थानीय नेता तथा सांसद, विधायक उनके निशाने पर बुधवार को भी रहे। कुलपति ने कहा कि आखिर सभी दल के नेता सांसद, विधायक छात्रों के साथ क्याें गए। उनका कहना है कि इसी तरह से दबाव बनाया जाएगा तो काम करना कठिन होगा।
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