High Court : निजी विवाद को सेवा कदाचार नहीं मान सकते, बर्खास्तगी के खिलाफ दायर एसबीआई की विशेष अपील खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी के निजी जीवन से जुड़े विवाद को महज इस आधार पर सेवा संबंधी कदाचार नहीं माना जा सकता कि घटना कार्यस्थल पर हुई है। कथित कृत्य और कर्मचारी की नौकरी के बीच वास्तविक, ठोस व निकट संबंध का होना जरूरी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी के निजी जीवन से जुड़े विवाद को महज इस आधार पर सेवा संबंधी कदाचार नहीं माना जा सकता कि घटना कार्यस्थल पर हुई है। कथित कृत्य और कर्मचारी की नौकरी के बीच वास्तविक, ठोस व निकट संबंध का होना जरूरी है। इस आधार पर कोर्ट ने कर्मचारी विजयानंद राय की बर्खास्तगी के मामले में आरबीआई की विशेष अपील खारिज कर एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह व न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने दिया है। कानपुर नगर में आरबीआई कार्यालय में विजयानंद तृतीय श्रेणी कर्मचारी थे। 13 मई 2003 को एक महिला उनसे मिलने आई। आरोप था कि विजयानंद ने महिला को थप्पड़ मारा और उसे कार्यालय से बाहर कर दिया। इसके बाद वह भी वरिष्ठ अधिकारियों से बिना अनुमति व सूचना के कार्यालय से चले गए।
आरबीआई ने मामले में सेवा नियमों के तहत कदाचार मानते हुए बर्खास्त कर दिया तो उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए बर्खास्तगी आदेश रद्द कर दिया। इसके बाद आरबीआई ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की।
खंडपीठ ने पाया कि महिला न तो आरबीआई की कर्मचारी थी और न ही वह किसी आधिकारिक काम से बैंक आई थी। वह विजयानंद से मिलने के लिए कार्यालय आई थी। कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए यह संभावना स्वीकार की कि दोनों के बीच निजी विवाद था, जो बाद में परिवार न्यायालय तक पहुंचा। कोर्ट ने कहा कि विजयानंद पहले ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसलिए ने सक्षम प्राधिकारी को बर्खास्तगी से सेवानिवृत्ति तक की अवधि के बकाया वेतन के दावे पर तीन महीने के भीतर फैसला करने और कानून के अनुसार परिणामी सेवानिवृत्त लाभों पर विचार करने का निर्देश दिया।