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प्राथमिक स्कूलों में 12460 अध्यापकों की भर्ती पर रोक

Wed, 17 May 2017 02:20 AM IST
इलाहाबाद
इलाहाबाद Updated Wed, 17 May 2017 02:20 AM IST
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Prevention of recruitment of 12460 teachers in primary schools
Demo Pic - फोटो : google
प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में चल रही 12460 सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश को निर्देश दिया है कि वह चयनित अभ्यर्थियों को क्वालिटी प्वाइंट अंक देने में गड़बड़ी को दुरुस्त करने के लिए नया फार्मूला बनाएं और भर्तियां उसके अनुसार करें। सचिव द्वारा तैयार फार्मूले से ही अब भर्तियां होंगी। अंकों के गुणांक का नया फार्मूला बनने तक कोई चयन नहीं किया जाएगा।
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चयन प्रक्रिया में बीटीसी 2012 और 2013 बैच के अभ्यर्थियों को शामिल किया गया था, मगर इनके क्वालिटी प्वाइंट अंकों का निर्धारण करते समय भेदभाव करने का आरोप है। बीटीसी 2012 बैच के अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली थी। याचिका पर न्यायमूर्ति अभिनव उपाध्याय ने सुनवाई की। याचीगण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सीमांत सिंह ने कहा कि 20 दिसंबर 2016 को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद ने चयन हेतु गाइड लाइन जारी की। इसमें हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक और बीटीसी के प्राप्तकों को जोड़ कर क्वालिटी प्वाइंट अंकोें का निर्धारण किया जाना था।
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बीटीसी 2012 के अभ्यर्थियों को प्रथम श्रेणी 60 प्रतिशत अंक के लिए 12 प्वाइंट, 59 से 48 प्रतिशत तक को छह प्वाइंट तथा 47 से 33 प्रतिशत तक को तीन प्वाइंट देने का निर्णय लिया गया। मगर बैच 2013 का परिणाम प्रतिशत में जारी न करके ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर किया गया था। इसलिए ए ग्रेड वालों को 80 प्रतिशत से अधिक अंक, बी ग्रेड वालों को 79 से 65 अंक और सी ग्रेड वालों को 64 से 50 प्रतिशत अंक मानते हुए क्वालिटी प्वाइंट देने का निश्चय किया गया। चयन के समय विभाग ने बी ग्रेड वालों को प्रथम श्रेणी मानते हुए 12 प्वाइंट दे दिए। इससे बीटीसी 2012 बैच के अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है, क्योंकि बी ग्रेड वालों की संख्या अधिक है जबकि नियमानुसार ए ग्रेड को प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस गड़बड़ी मानते हुए चयन पर रोक लगा दी है तथा सचिव को सही फार्मूला तय करने का आदेश दिया है।
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