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प्रेमचंद्र का उपन्यास: सांस्कृतिक मंच पर झलका निर्मला का दर्द
Tue, 26 Feb 2019 06:05 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 26 Feb 2019 06:05 PM IST
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संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से साफ्ट पावर आर्ट एंड कल्चर के बैनर तले सोमवार को अमर शहीद चंद्रेशेखर आजाद पार्क शहीद स्थल के आर्मी बैण्ड मंच पर मंच पर कहानीकार मुंशी प्रेमचंद्र की उपन्यास निर्मला का नाट्य मंचन किया गया। जिसमें निर्मला की दर्द भरी कहानी को कलाकारों ने उकेरा। मंंचन में दर्शाया गया कि निर्मला का परिवार गरीब था। दहेज के चलते इसकी शादी नहीं हो पा रही थी। इसी चिंता में निर्मला के पिता का देहांत हो गया। इससे परिवार में कलह पैदा हो गई।
परिवार वाले निर्मला की शादी एक ऐसे व्यक्ति से कर देना चाहते थे कि जो पहले से बूढ़ा था। वह इस बेमेल शादी से खुश नहीं थी। लेकिन मजबूरी में तोता राम से शादी हो गई। जिसके दो बेटे मंशा राम और जियाराम थे। शादी के बाद वह खुश नहीं थी। वह अपने बड़े बेटे के हमउम्र के कारण हंसी और मजाक के साथ उसे पढ़ाने में पूरा समय देती थी। लेकिन इसके पति को यह गंवारा नहीं था। वह अपन पत्नी पर शक करने लगा। इससे परिवार में कलह मच गई।
इस कलह से बड़ा अलग हो गया और कुछ दिन बाद इसकी मौत हो गई। यही क्रम दूसरे बेटे के साथ हुआ वह भी चल बसा। इसका का पूरा आरोप पति तोता राम ने निर्मला पर मढ़ दिया। निर्मला असहाय होकर पति को छोड़ दिया। नाटक का निर्देशन साफ्ट पावर आर्ट एंड कल्चर के सचिव ज्ञान चंद्र यादव ने किया।
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परिवार वाले निर्मला की शादी एक ऐसे व्यक्ति से कर देना चाहते थे कि जो पहले से बूढ़ा था। वह इस बेमेल शादी से खुश नहीं थी। लेकिन मजबूरी में तोता राम से शादी हो गई। जिसके दो बेटे मंशा राम और जियाराम थे। शादी के बाद वह खुश नहीं थी। वह अपने बड़े बेटे के हमउम्र के कारण हंसी और मजाक के साथ उसे पढ़ाने में पूरा समय देती थी। लेकिन इसके पति को यह गंवारा नहीं था। वह अपन पत्नी पर शक करने लगा। इससे परिवार में कलह मच गई।
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इस कलह से बड़ा अलग हो गया और कुछ दिन बाद इसकी मौत हो गई। यही क्रम दूसरे बेटे के साथ हुआ वह भी चल बसा। इसका का पूरा आरोप पति तोता राम ने निर्मला पर मढ़ दिया। निर्मला असहाय होकर पति को छोड़ दिया। नाटक का निर्देशन साफ्ट पावर आर्ट एंड कल्चर के सचिव ज्ञान चंद्र यादव ने किया।
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