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Prayagraj News: कुबूल हुई दुआ... थमा शोर, अब अपनों की वापसी का इंतजार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:20 AM IST
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Prayers answered... the noise has stopped, now we wait for our loved ones to return.
हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी
ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जंग के दौरान 40 दिन कैसे गुजरे, बयां नहीं कर सकते। मिसाइल-राकेट गिरती तो कलेजा कांप उठता। चैन की नींद सोना दूभर था। लगातार हमलों और सायरन के बीच बुधवार को जब युद्ध विराम की खबर आई तो खाड़ी देशों में काम करने वाले क्षेत्र के सैकड़ों कामगारों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने फोन कर युद्ध विराम की जानकारी दी तो परिजन भी फफक पड़े। अब वह अपनों के घर लौटने की राह देख रहे हैं।
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मऊआइमा के सैकड़ों लोग खाड़ी देशों में रह रहे हैं। ईरान, इस्राइल और अमेरिका जंग के बीच वह असुरक्षित थे। उन्हें हर दिन सुरक्षित स्थान पर भागना पड़ता था। अब युद्ध विराम की घोषणा हुई तो कामगारों के साथ उनके परिजन भी झूम उठे। परिजनों ने भी अपनों की सलामती के लिए दिन-रात दुआ की थी, जो कुबूल हो गई।
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रियाद में दुकान से दो किमी दूर गिरी थी मिसाइल

मऊआइमा के बहराना निवासी मोबीन अहमद सऊदी अरब के रियाद में रहकर इलेक्ट्रॉनिक शॉप चलाते हैं। उन्होंने बताया जंग के दौरान हमारी शॉप से महज दो किमी की दूरी पर मिसाइल गिरी थी। हम सभी दहशत में थे। बुधवार को युद्ध विराम की सूचना से राहत मिली है।
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मो. असलम ने कहा, अब मिला सुकून

मऊआइमा के मऊदोस्त निवासी मो. असलम सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और सऊदी अरब के अल-कसीम में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि ड्रोन और मिसाइल के हमलों से हर वक्त खौफ बना रहता था। मेरे साथ के दो लोग एक सप्ताह पहले मिसाइल हमले में बुरी तरह जख्मी हो गए थे। जंग रुकने की खबर ने सुकून दिया।
हफीज बोले- सुबह से शाम तक बना रहता था खौफ

सिकंदरा निवासी मो. हफीज अहमद सऊदी अरब के अल-खर्च स्थित अमेरिकी एयरबेस के समीप ही बेल्डिंग का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने से सुबह से शाम तक मौत का खौफ बना रहता था। सीजफायर की खबर सुनकर दिल को बहुत सुकून मिला है।


बहरीन में रह रहे अजीज फारूकी ने जताई खुशी

रोजी रोटी के सिलसिले में बहरीन में परिवार के साथ रह रहे मऊआइमा के अब्दुल अजीज फारूकी ने कहा कि युद्ध रुकने से शांति व स्थिरता कायम होगी। उन्होंने बताया कि बहरीन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर गिरने वाली मिसाइलें उनकी छत से होकर गुजरती थीं। ऐसे में बच्चे काफी डरे सहमे रहते थे।

हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी

हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी

हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी

हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी

हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी

हरिसेनगंज - अब्दुल अजीज फारूकी

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