prayagraj violence : जावेद पंप का घर गिराने के खिलाफ नागरिक समाज लोगों ने किया प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग की है। साथ ही जावेद पंप के घर को तत्काल सरकारी खर्च पर बनवाने की मांग की गई।
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नागरिक समाज संगठन के बैनर तले बड़ी संख्या में धरना स्थल पर जुटे संगठन के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार की बुल्डोजर नीति के खिलाफ कड़े तेवर अपनाए। इसमें शहर के कई बुद्धिजीवी, प्रोफेसर, ट्रेड यूनियन लीडर्स, साहित्यकार, अधिवक्ता, छात्र एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे और प्रतिरोध धरने पर कई घंटे तक काली पट्टी बांधे बैठे रहे। धरने को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार की बुल्डोजर नीति, भारतीय संविधान और न्याय प्रणाली के साथ मजाक है।
प्रदेश सरकार की इस बुल्डोजर नीति से आम नागरिकों में भय का वातावरण बन रहा है। जिससे लोगों के मन से कानून राज के प्रति विश्वास कमजोर हो रहा है। सरकार की इस मनमानी कार्रवाई से पूरे भारतीय समाज में अराजकता का माहौल तैयार होगा। इसलिए कोई भी व्यक्ति अगर कानून का उल्लंघन करता है तो उसके ऊपर कार्रवाई भी पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए, न कि बुल्डोजर नीति से उसके घर को जमींदोज करके।
इस अवसर पर शुक्रवार को अटाला क्षेत्र में हुई घटना की निंदा की गई और कहा गया कि पूरा घटनाक्रम शासन-प्रशासन की लापरवाही के चलते हुआ। वक्ताओं ने प्रशासन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि पुलिस की ओर से निर्दोष लोगों पर उत्पीड़न की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस को शहर में अमन और चैन का माहौल बनाना चाहिए न कि लोगों के अंदर डर पैदा करना चाहिए।
नागरिक समाज की ओर से कहा गया कि पूरे घटनाक्रम में बिना किसी सबूत के जावेद अहमद को मास्टरमाइंड बताया गया और उनकी निर्दोष पत्नी परवीन फातिमा के घर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के तहत बुल्डोजर से ढ़हा दिया गया और उन्हें 30 घंटे से अधिक समय तक थाने पर बिठाए रखा गया जोकि कानून के खिलाफ है। आखिर में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसीएम द्वितीय को सौंपा गया।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से अटाला क्षेत्र में हुई हिंसक घटना की निष्पक्ष न्यायिक जांच, अवैध तरीके से ढ़हाए गए मकान का पुनर्निमाण का आदेश एवं पांच करोड़ रुपये बतौर मुआवजा दिए जाने, कानून का उल्लंघन करने वाले पीडीए के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. आशीष मित्तल, शाह आलम, जीशान रहमानी, उमर खालिद, आदि का उत्ड़ीपन बंद किए जाने एवं उनके झूठे मुकदमे को वापस लिए जाने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही ।
धरने में मुख्य रूप से समकालीन जनमत के प्रधान संपादक राम राय, प्रो. सुधांशू मालवीय, आनंद मालवीय, हरीशचंद्र द्विवेदी, प्रो. वल्लभ, अधिवक्ता केके राय, राम सिंह, राजवेंद्र सिंह, एम सईद, स्मृति कार्तिकेय, प्रबल प्रताप, नौशाद खां, राजीव कुमार, सबीहा मोहानी, गायत्री गागुंली, सरताज सिद्दीकी, कसान समेत कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। अध्यक्षता पीयूसीएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि किरण जैन ने एवं संचालन डॉ. कमल उसरी ने किया।