प्रयागराज : दुष्कर्म केस में गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में इंस्पेक्टर सहित तीन पर गिरी गाज
सर्विलांस प्रभारी, हंडिया इंस्पेक्टर समेत तीन हटाए गए। दुष्कर्म केस के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने का मामला। तीनों जोनल दंगा नियंत्रण इकाई से संबद्ध किए गए।
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दुष्कर्म मामले के गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के मामले में मंगलवार को कार्रवाई हुई। जनपदीय सर्विलंास प्रभारी संजय सिंह यादव, हंडिया इंस्पेक्टर बृजेश सिंह यादव व नारकोटिक्स प्रभारी एसआई महावीर सिंह को हटा दिया गया है। तीनों को उनके वर्तमान तैनाती स्थल से हटाकर जोनल दंगा नियंत्रण इकाई से संबद्ध कर दिया गया। मामले का संज्ञान लेते हुए एडीजी जोन प्रेमप्रकाश ने यह कार्रवाई की।
इस मामले से संबंधित खबर एक दिन पहले अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी। जिसमें बताया गया था कि किस तरह दुष्कर्म पीड़िता पर दबाव बनाने के लिए उसके गवाह को हंडिया थाने में दर्ज दुष्कर्म के मामले में फर्जी तरीके से जेल भेज दिया गया। साथ ही पोल खुलने पर अपनी गर्दन बचाने के लिए उसे आननफानन में सीआरपीसी 169 के तहत रिपोर्ट भेजकर जेल से रिहा भी करा दिया गया।
खबर छपने के बाद हड़कंप मच गया। उधर, अफसरों ने भी मामले का संज्ञान ले लिया। पूछताछ के बाद मामले में कार्रवाई की गई। सर्विलंास प्रभारी संजय सिंह यादव, हंडिया इंस्पेक्टर बृजेश सिंह और नारकोटिक्स प्रभारी महाबीर सिंह को हटाकर जोनल दंगा नियंत्रण इकाई में भेज दिया गया। आरोप है कि तीनों की मिलीभगत से ही यह खेल हुआ। जिसमें मुकदमे में दबाव बनाने के लिए गवाह को फर्जी तरीके से सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। उधर पूरामुफ्ती इंस्पेक्टर व एक महिला सिपाही को भ्भी दंगा नियंत्रण इकाई में भेजा गया है।
सीएम का स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी हाल में दागी छवि वाले पुलिसकर्मियों को फील्ड में तैनाती न दी जाए। उन्होंने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी इस संबंध में निर्देश दिए थे। गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजने के आरोप बेहद गंभीर हैं। प्रथम दृष्टया भूमिका संदिग्ध होने पर तीनों पुलिसकर्मियों को जोनल दंगा नियंत्रण इकाई में संबद्ध किया गया है। मामले की जांच एडिशनल एसपी से कराई जा रही है। डीआईजी को निर्देशित किया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए। -प्रेमप्रकाश, एडीजी प्रयागराज जोन
सर्विलांस से लोकेशन निकालकर पकड़ा था गवाह को सूत्रों का कहना है कि सर्विलंास प्रभारी संजय सिंह यादव ने अपने पद का फायदा उठाते हुए इस मामले में खेल किया। उसने हंडिया इंस्पेक्टर और नारकोटिक्स प्रभारी को भी शामिल कर लिया। इसके बाद खुद गवाह की लोकेशन सर्विलांस के जरिए निकालकर उसे शहर से पकड़वाया और फिर हंडिया इंस्पेक्टर को सौंप दिया। जिसके बाद हंडिया थाने में दाखिला कराकर उसे जेल भेज दिया गया।
स्कूटी पर लगा दिया ट्रक का नंबर
इस मामले में एक और खेल किया गया। गवाह को जिस स्कूटी के साथ पकड़ा गया, उसकी नंबर प्लेट भी बदल दी गई। सूत्रों का कहना है कि गवाह को शहरी क्षेत्र से पकड़ा गया, जिसके कब्जे से स्कूटी भी मिली। इस स्कूटी को पहले कर्नलगंज थाने ले जाया गया। वहां से इसे हंडिया थाने भेजा गया और बीच रास्ते में ही स्कूटी की ओरिजिनल नंबर प्लेट बदलकर इस पर ट्रक की नंबरप्लेट लगा दी गई। ऐसा इसलिए किया गया ताकि गवाह को जालसाजी का भी आरोपी बनाया जा सके।