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Prayagraj : बंगाल के दो खातों से 22 अन्य खातों में ट्रांसफर हुए 1.31 करोड़ रुपये, पुलिस को मिली ट्रेल

Wed, 27 Nov 2024 02:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 27 Nov 2024 02:20 PM IST
सार

ट्रेल मिलने के बाद पुलिस अब खाते को एक्सेस करने यानी नेटबैंकिंग के जरिये रकम निकालने वालों की आईपी ट्रेस करने में जुट गई है। ठगी की कुल रकम में से इन दोनों खातों में कुल 1.43 करोड़ रुपये भेजे गए थे।

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Prayagraj: Rs 1.31 crore transferred from two accounts in Bengal to 22 other accounts, police found trail
नंद गोपाल गुप्ता नंदी, कैबिनेट मंत्री। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के बेटे के अकाउंटेंट से 2.08 करोड़ की ठगी में पुलिस को कोलकाता व सिलिगुड़ी के खातों की भी ट्रेल मिली है। पता चला है कि इन खातों से 22 अन्य खातों में कुल 1.31 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

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ट्रेल मिलने के बाद पुलिस अब खाते को एक्सेस करने यानी नेटबैंकिंग के जरिये रकम निकालने वालों की आईपी ट्रेस करने में जुट गई है। ठगी की कुल रकम में से इन दोनों खातों में कुल 1.43 करोड़ रुपये भेजे गए थे।

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इनमें से महज 12.22 लाख रुपये ही अब इन खातों में बचे हैं, जबकि शेष रकम निकाली जा चुकी है। जांच में यह बात सामने आई है कि कुल 1.31 करोड़ रुपये अलग-अलग 22 खातों में ट्रांसफर किए गए। अब इस बात का पता लगाया जा रहा है कि सिलिगुड़ी व कोलकाता के कंकुरगाछी के दो खातों से रकम अन्य खातों में भेजने में किस आईपी का इस्तेमाल हुआ।

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दरअसल दो दिन पहले जेल भेजे गए गिरोह के दो भारतीय एजेंटों ने पूछताछ में यह बात बताई है कि ठगी की रकम को बहुत तेजी से एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता है। इसके लिए नेटबैंकिंग से खाता एक्सेस किया जाता है। ऐसे में पुलिस इसका पता लगा रही है कि नेटबैंकिंग के लिए किस आईपी एड्रेस का इस्तेमाल हुआ। गौरतलब है कि पूर्व में जेल भेजे गए दोनों एजेंटों दिव्यांशु व पुलकित को भी पुलिस ने आईपी एड्रेस से ही ट्रेस किया था।

संजीव पहले भी दे चुका था तीन खाते

सूत्रों के मुताबिक, जेल भेजे जाने से पहले आरोपियों में शामिल दोनों एजेंटों दिव्यांशु व पुलकित ने कुछ और भी खुलासे किए। बताया कि बरेली का संजीव उन्हें पहले भी कमीशन के लालच में अपने तीन खातों का एक्सेस दे चुका था। इसके बदले उसे तीन लाख रुपये तीन बार में दिए गए। उधर उसका साला सुरजीत अपनी जान पहचान के ऐसे लड़कों को ढूंढ़ता था जो पैसों के लिए खाता खुलवाने व खाते का एटीएम कार्ड, कस्टमर आईडी, पासवर्ड देने को तैयार हो जाते थे।

पूरी रकम की बरामदगी बेहद मुश्किल

पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में खाते में बचे रुपयों को छोड़कर शेष रकम की बरामदगी पुलिस के लिए बेहद मुश्किल है। बरेली स्थित आईसीआईसीआई बैंक के खाते में भेजी गई 65 लाख की रकम में से एक रुपये भी साइबर ठगों ने शेष नहीं छोड़े हैं। जबकि कोलकाता व सिलिगुड़ी स्थित खातों में भेजी गई रकम में से भी महज 12.22 लाख रुपये बचे हैं। ऐसे में पूरी रकम की बरामदगी का टास्क पुलिस के लिए टेढ़ी खीर है।

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