Prayagraj News: बार काउंसलिंग ने की हापुड़ लाठीचार्ज की कड़ी निंदा, बैठक में जल्द तय होगी आगे की रणनीति
बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के सदस्य व पूर्व चेयरमैन अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि पुलिस द्वारा सामंती मानसिकता से ग्रसित होकर बिना समुचित कारण के अधिवक्ताओं, महिलाओ पर बर्बर लाठीचार्ज के आरोपियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई न होना बहुत निन्दनीय है।
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उत्तर प्रदेश बार कौंसिल ने हापुड़ लाठीचार्ज के विरोध में तीन दिन तक न्यायिक कार्य न करने का फैसला लिया था। जिसके क्रम में बुधवार को तीसरे दिन जिला जनपद न्यायालय, केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), राजस्व परिषद और व्यावसायिक कर अधिकारी कार्यालय के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं ने अदालती कामकाज तो किया लेकिन नो एडवर्स का प्रस्ताव होने के कारण कामकाज की रफ्तार धीमी रही।
हाईकोर्ट बार पदाधिकारियों के निर्णय से खफा अधिवक्ताओं का एक गुट सुबह नौ बजे पहुंच गया। हाईकोर्ट के गेट नंबर तीन पर एकत्र होकर सरकार, पुलिस और बार पदाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। लाइब्रेरी हाॅल में पूर्व महासचिव एसी तिवारी की अध्यक्षता में सभा की गई। बार कार्यकारिणी द्वारा लिए गए निर्णय आलोचना करते हुए आम सभा बुलाने की मांग का ज्ञापन बार के कार्यालय में सौंपा गया। सभा का संचालन पूर्व संयुक्त सचिव संतोष कुमार मिश्रा ने किया। इस अवसर पर उदय शंकर तिवारी, कृष्ण मुरारी त्रिपाठी, सुरेश चंद्र मिश्रा,सुभाष चंद्र यादव, दीपांकर द्विवेदी समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।
इसके बाद आयोजित सभा में हापुड़ के एसपी और सीओ के स्थानांतरण के साथ घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के साथ घायल वकीलों के सहायता देने की मांग की।
अधिवक्ताओं ने कहा कि जो जांच कमेटी बनी है, उसमें यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन और रिटायर्ड हाईकोर्ट जज को शामिल किया जाए। साथ ही कहा कि वकीलों की हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी।
उधर, हापुड़ घटना के मामले में पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक ने कहा कि बार की पहल के बाद इस मामले में कोर्ट ने आदेश पारित किया है। उन्हीं के प्रयास से प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश हुआ है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन हापुड़ अधिवक्ताओं के साथ है। वह किसी के खिलाफ नहीं है। न्यायिक स्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया गया है।
जिला अधिवक्ता संघ के मंत्री विद्या वारिधि मिश्र ने बताया कि बार काउंसिल प्रस्ताव के मुताबिक कचहरी में वकील न्यायिक कार्य से विरत रहे। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) बार एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष जितेंद्र नायक के मुताबिक कैट में भी अदालती काम ठप रहा। पूर्व महामंत्री बाल कृष्ण पांडेय ने बताया कि आगे की रणनीति बार काउंसिल के आदेश मुताबिक बनाई जाएगी। इसी प्रकार जिला टैक्स बार एसोसिएशन के वकील भी न्यायिक कार्य से विरत रहे।
बार कौंसिल के सदस्य प्रदीप कुमार सिंह ने चेयरमैन को पत्र लिखकर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रेस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। पत्र में कहा है कि चेयरमैन हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महासचिव को संयुक्त सचिव प्रेस के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देशित करें।
पत्र में कहा गया है कि संयुक्त सचिव प्रेस की ओर से एक पत्र वायरल है, जिसमें कही गई बात अधिवक्ताओं की छवि को धूमिल की है। यह अधिवक्ताओं के सम्मान से खिलवाड़ है। जबकि, बार कौंसिल के निर्णय के पक्ष में पूरे देश की बार एसोसिएशन व अधिवक्ता समाज बहुत संजीदगी से नजर बनाए हुए है।
उधर, संयुक्त सचिव प्रेस का कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र या संदेश जारी नहीं किया जो अधिवक्ताओं के हितों के खिलाफ हो। उनके द्वारा जो भी सूचना जारी की गई वह बार एसोसिएशन का निर्णय है। उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि बार कौंसिल सदस्य ने किस संदर्भ के तहत ऐसी पहल की है।