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Maha Kumbh: कूड़ा, जल, मौसम और धर्म पर शोध का भी महाकुंभ... रचेंगे कीर्तिमान; तैयार होगा डाटा बेस
Sat, 04 Jan 2025 09:51 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 04 Jan 2025 09:51 AM IST
सार
कूड़ा, जल, मौसम और धर्म पर शोध का भी महाकुंभ होगा। आईआईटी गुवाहाटी-कानपुर, एमएनआईआईटी, इविवि के साथ मेला प्रशासन का करार हुआ है। डाटा बेस तैयार होगा।
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शाम होते ही मेला क्षेत्र दूधिया रोशनी से नहा जाता है। ऐसा लगता है कि सभी देवता कृपा बरसा रहे हों।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महाकुंभ मेले के दौरान शोध के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित होंगे। संगम जल, मौसम, आयोजन के धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक समेत अन्य पहलुओं पर अध्ययन होंगे, साथ ही डाटा बेस तैयार किए जाएंगे। इसके लिए मेला प्रशासन और संस्थाओं के बीच समझौते हुए हैं।
कूड़े और उसके दुष्प्रभाव पर बंगलूरू विवि कर रहा अध्ययन मेला क्षेत्र से निकलने वाले कचरे एवं सीवेज के अलावा उनके निस्तारण की व्यवस्था का हिसाब रखा जाएगा। क्षेत्र के अलावा आसपास के मोहल्लों में इसके पड़ने वाले दुष्प्रभाव व बचाव के लिए किए गए उपायों का भी लेखा-जोखा तैयार होगा।
इस पर बंगलूरू विश्वविद्यालय अध्ययन करेगा। इसके लिए मेला प्रशासन और विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के साथ समझौता हुआ है। संस्था अध्ययन के आधार पर गंदगी के निस्तारण व इससे होने वाले नुकसान से बचाव की बाबत सुझाव भी देगी। विवि विशेषज्ञों की चार टीमों ने अध्ययन शुरू कर दिया है।
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इविवि करेगा गंगा-यमुना के जल का नियमित अध्ययन
मेले के दौरान गंगा में कॉस्मेटिक व भारी धातुओं से होने वाले प्रदूषण की निगरानी की जाएगी। इसमें ऑर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग होगा। निगरानी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग में वैज्ञानिक दल का गठन किया गया है, जो जांच परिणाम मेला प्रशासन व अन्य सरकारी एजेंसियों से साझा करेगा।
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कूड़े और उसके दुष्प्रभाव पर बंगलूरू विवि कर रहा अध्ययन मेला क्षेत्र से निकलने वाले कचरे एवं सीवेज के अलावा उनके निस्तारण की व्यवस्था का हिसाब रखा जाएगा। क्षेत्र के अलावा आसपास के मोहल्लों में इसके पड़ने वाले दुष्प्रभाव व बचाव के लिए किए गए उपायों का भी लेखा-जोखा तैयार होगा।
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इस पर बंगलूरू विश्वविद्यालय अध्ययन करेगा। इसके लिए मेला प्रशासन और विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के साथ समझौता हुआ है। संस्था अध्ययन के आधार पर गंदगी के निस्तारण व इससे होने वाले नुकसान से बचाव की बाबत सुझाव भी देगी। विवि विशेषज्ञों की चार टीमों ने अध्ययन शुरू कर दिया है।
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इविवि करेगा गंगा-यमुना के जल का नियमित अध्ययन
मेले के दौरान गंगा में कॉस्मेटिक व भारी धातुओं से होने वाले प्रदूषण की निगरानी की जाएगी। इसमें ऑर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग होगा। निगरानी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग में वैज्ञानिक दल का गठन किया गया है, जो जांच परिणाम मेला प्रशासन व अन्य सरकारी एजेंसियों से साझा करेगा।
30 सदस्यीय दल ने विभाग की 100 साल पुरानी प्रयोगशाला में स्पेक्ट्रोस्केपी के अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से गंगा जल के नमूनों की जांच शुरू कर दी है। रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक से एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप (एएफएम) की मदद से एकीकृत जांच होगी।
इससे ज्यादा सटीक परिणाम जल्द सामने आएंगे। भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. केएन उत्तम ने बताया कि वैज्ञानिक दल में छात्र, शोधार्थी और शिक्षक शामिल हैं। महाकुंभ के दो माह बाद तक गंगा जल के नमूनों की जांच की जाएगी।
आईआईटी करेंगे मेला के हर पहलुओं पर शोध
गुवाहाटी व कानपुर आईआईटी की टीम महाकुंभ का समग्र अध्ययन करेगी। टीमें महाकुंभ के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, विकास के पहलुओं पर शोध करेंगी। इसकी रिपोर्ट मेला प्रशासन से साझा की जाएगी। इन संस्थाओं ने अध्ययन शुरू कर दिया है।
गुवाहाटी व कानपुर आईआईटी की टीम महाकुंभ का समग्र अध्ययन करेगी। टीमें महाकुंभ के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, विकास के पहलुओं पर शोध करेंगी। इसकी रिपोर्ट मेला प्रशासन से साझा की जाएगी। इन संस्थाओं ने अध्ययन शुरू कर दिया है।
विदेशी संस्थान भी करेगी समग्र अध्ययन
महाकुंभ के समग्र अध्ययन विदेशी संस्था भी करेगी। सीएम योगी के निर्देश पर विदेशी संस्था के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेशी संस्था भी महाकुंभ के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और विकास के पहलुओं पर शोध करेगी।
महाकुंभ के समग्र अध्ययन विदेशी संस्था भी करेगी। सीएम योगी के निर्देश पर विदेशी संस्था के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेशी संस्था भी महाकुंभ के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और विकास के पहलुओं पर शोध करेगी।
तापमान, बारिश और आर्द्रता की रिपोर्ट होगी तैयार
मेला और आसपास के क्षेत्रों में मौसम के मिजाज का भी अध्ययन होगा। इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग और मेला प्रशासन के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान एवं अरैल के सेक्टर-23 में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए गए हैं। इनकी मदद से तापमान, बारिश और आर्द्रता की पल-पल की रिपोर्ट तैयार होगी।
मेला और आसपास के क्षेत्रों में मौसम के मिजाज का भी अध्ययन होगा। इसके लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग और मेला प्रशासन के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत इलाहाबाद विश्वविद्यालय, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान एवं अरैल के सेक्टर-23 में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन लगाए गए हैं। इनकी मदद से तापमान, बारिश और आर्द्रता की पल-पल की रिपोर्ट तैयार होगी।
एमएनएनआईटी-केंद्रीय भूजल बोर्ड ने भी गंगाजल के परीक्षण को भेजा प्रस्ताव
एमएनएनआईटी और सीजीडब्ल्यूबी (केंद्रीय भूजल बोर्ड) की ओर से भी महाकुंभ में स्नान पर्व के पहले और बाद में गंगाजल की जांच की जाएगी। इसके लिए दोनों संस्थाओं की ओर से एनएमजीसी (राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन) को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिन में इसके लिए एनएमजीसी से हरी झंडी मिल जाएगी, जिसके बाद दोनों संस्थानों के भूजल वैज्ञानिकों की ओर से गंगाजल का परीक्षण किया जाएगा। इसके तहत महाकुंभ में स्नान पर्व से पहले और बाद की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।
एमएनएनआईटी और सीजीडब्ल्यूबी (केंद्रीय भूजल बोर्ड) की ओर से भी महाकुंभ में स्नान पर्व के पहले और बाद में गंगाजल की जांच की जाएगी। इसके लिए दोनों संस्थाओं की ओर से एनएमजीसी (राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन) को प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि एक-दो दिन में इसके लिए एनएमजीसी से हरी झंडी मिल जाएगी, जिसके बाद दोनों संस्थानों के भूजल वैज्ञानिकों की ओर से गंगाजल का परीक्षण किया जाएगा। इसके तहत महाकुंभ में स्नान पर्व से पहले और बाद की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।