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राजू पाल हत्याकांड : सीबीआई ने मुकदमे को ट्रायल के लिए सत्र न्यायालय को भेजा, सभी अभियुक्तों को पेश होने का आदेश

Fri, 22 Oct 2021 05:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो , प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 22 Oct 2021 05:32 PM IST
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Prayagraj: Magistrate's testimony in the case of former MLA Ashraf
खालिद अजीम उर्फ अशरफ। - फोटो : prayagraj
प्रयागराज के बहुचर्चित राजू पाल हत्यकांड के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने मुकदमे को ट्रायल के लिए सत्र न्यायालय को भेज दिया है। सीबीआई की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट यशा शर्मा ने सभी आरोपियों को  नौ नवंबर को पेश होने का आदेश जारी किया है। शुक्रवार को आरोपी पूर्व सांसद अतीक अहमद साबरमती जेल, पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ बरेली जेल और फहीम अहमद चित्रकूट जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत में उपस्थित हुए। इस मामले में जमानत पर छूट चुके आरोपी गुलशन, आबिद, इसरार और रंजीत पाल व्यक्तिगत रूप से न्यायालय के समक्ष पेश हुए।
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पूर्व विधायक राजू पाल हत्याकांड की जांच 22 जनवरी 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल किया था। सीबीआई ने चार्जशीट में अतीक और उसके भाई अशरफ और अन्य अभियुक्तों को हत्या, हत्या के प्रयास और साजिश आदि धाराओं में आरोपी बनाया है।
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पूर्व विधायक राजू पाल की हत्या 25 जनवरी 2005 को कर दी गई थी। 2004 में वह बतौर बसपा प्रयाशी प्रयागराज की शहर पश्चिमी सीट से चुनाव जीते थे। यह सीट अतीक अहमद के फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद रिक्त हुई थी। अशरफ ने अतीक अहमद के भाई अशरफ को पराजित किया था। इसी के बाद से वह अतीक के गिरोह की आंख की किरकिरी बन गए थे। हत्या के महज 16 दन पहले ही राजू पाल की शादी पूजा पाल के साथ हुई थी। पूजा पाल ने धूमनगंज थाने में अतीक अहमद और उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
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एक अन्य मामले में स्पेशल कोर्ट एमपी एमएलए में पूर्व विधायक अशरफ के मुकदमे में क्षेत्राधिकारी बृज नारायण सिंह का बयान दर्ज किया गया। जिरह के लिए बचाव पक्ष ने अग्रिम तारीख देने की याचना की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर 11 नवंबर की तारीख नियत कर दी है। क्षेत्राधिकारी की गवाही स्पेशल कोर्ट के जज आलोक कुमार श्रीवास्तव के समक्ष हुई।

गवाह बृज नारायण सिंह ने अपने बयान में कहा कि खालिद अजीम उर्फ अशरफ की गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से एक 32 बोर की पिस्तौल मिली थी। जिसका वह लाइसेंस नहीं दिखा सका था। घटना 3 जुलाई 2020 थाना धूमनगंज की है। क्षेत्राधिकारी ब्रिज नारायण सिंह ने थाना धूमनगंज में अशरफ के विरुद्ध आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।


इसी प्रकरण में क्षेत्राधिकारी को गवाही के लिए कोर्ट ने तलब किया था। कोर्ट ने बचाव पक्ष से जिरह करने के लिए कहा। तब अशरफ के अधिवक्ताओं ने जिरह के लिए तारीख देने की याचना की जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। प्रकरण में गवाही और जिरह के लिए 11 नवंबर की तारीख नियत की गई।
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