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शिक्षक भर्ती: चयनितों में से 10 फीसदी से अधिक धांधली साबित होने पर निरस्त हो सकती है परीक्षा
Tue, 09 Jun 2020 11:12 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 09 Jun 2020 11:12 PM IST
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- फोटो : social media
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परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगाया जा रहा है, नकल कराने वाले गिरोह के पास मिले साक्ष्य के आधार पर परीक्षा में अच्छी मेरिट लाने वाले कुछ अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी भी हुई है। टॉप मेरिट वालों की गिरफ्तारी के बाद अब यह मांग तेज हो उठी है कि परीक्षा रद्द करके नए सिरे से भर्ती परीक्षा कराई जाए।
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प्रदेश सरकार की ओर से पहली बार टीईटी कराए जाने के बाद 72825 शिक्षक भर्ती में चयनित शिक्षक अनुराग सिंह का कहना है कि परीक्षा निरस्त करना आसान नहीं है। उनका कहना है कि परीक्षा में पास हुए कुल 1.46 लाख परीक्षार्थियों में कम से कम 10 फीसदी का चयन गलत तरीके होने की बात साबित होने पर ही परीक्षा निरस्त करने पर विचार किया जा सकता है।
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उनका कहना है कि इस संबंध में हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट का समय-समय पर आदेश है कि जब तक 10 फीसदी गड़बड़ी साबित नहीं होती है तब तक परीक्षा निरस्त नहीं की जा सकती। उनका कहना है कि पुलिस की जांच के बाद अनुचित संसाधन से परीक्षा पास करने वालों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता है परंतु पूरी भर्ती निरस्त करना संभव नहीं।
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2011-12 में शिक्षक भर्ती में चयनित अनुराग सिंह ने बताया कि उन लोगों ने 72825 शिक्षक भर्ती में लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। इस दौरान प्रदेश में पहली बार हुई उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) में धांधली को लेकर गंभीर आरोप लगे थे। पूरा प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक गया, 2011 में हुई शिक्षक भर्ती टीईटी की मेरिट के आधार पर भरी गई थी।
इस परीक्षा असफल एक अभ्यर्थी ने पूरी परीक्षा निरस्त करने की मांग की थी। कोर्ट ने पूरी भर्ती में 10 फीसदी से अधिक की धांधली साबित नहीं होने से परीक्षा निरस्त करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि अभी तक पुलिस की जांच में कुछ लोगों को ही नकल के आरोप में पकड़ा गया है। ऐसे में 1.46 लाख सफल अभ्यर्थियों का 10 प्रतिशत गड़बड़ी साबित करना पुलिस के लिए अब परीक्षा के डेढ़ वर्ष बाद संभव नहीं होगा।