Prayagraj : गंगा के किनारे के शहरों में प्रयागराज पहले नंबर पर, लगाई ऊंची छलांग, मेयर ने लिया पुरस्कार
स्वच्छ सर्वेक्षण में गंगा के किनारे के शहरों में सफाई के मामले में प्रयागराज ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। पिछले वर्ष वाराणसी पहले और प्रयागराज दूसरे स्थान पर था।
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स्वच्छ सर्वेक्षण में गंगा के किनारे के शहरों में सफाई के मामले में प्रयागराज ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। पिछले वर्ष वाराणसी पहले और प्रयागराज दूसरे स्थान पर था। इतना ही नहीं, 10 लाख से अधिक आबादी के राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाले शहरों की सूची में कुंभनगरी 12वें स्थान पर रहा, जबकि पिछले वर्ष 71वें पायदान पर था। इस श्रेणी में अहमदाबाद पहले, भोपाल दूसरे और लखनऊ तीसरे स्थान पर है। बृहस्पतिवार को दिल्ली में आयोजित समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 के पुरस्कार की घोषणा की गई। सर्वे में विभिन्न श्रेणियों में संगमनगरी को पांच पुरस्कार प्राप्त हुए।
महाकुंभ के दौरान कई कीर्तिमान बनाने वाले प्रयागराज ने सर्वे में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, हालांकि सबसे महत्वपूर्ण सुपर स्वच्छता लीग श्रेणी में शामिल होने से संगमनगरी अभी काफी दूर है। स्वच्छ महाकुंभ-2025 के लिए भी कुंभनगरी को विशेष पुरस्कार से नवाजा गया। महाकुंभ के दौरान मेला क्षेत्र में शहर की बेहतर सफाई व्यवस्था की विश्व में चर्चा रही। इसके अलावा महाकुंभ में स्वच्छता को लेकर गंगा एवं मेला क्षेत्र की सफाई समेत कई कीर्तिमान भी बनाए गए थे।
इन उपलब्धियों के लिए प्रयागराज को यह पुरस्कार मिला। इसके अलावा मिनिस्टीरियल स्पेशल अवार्ड की कैटेगरी में छठा स्थान मिला है। वहीं, गार्बेज फ्री, वाटर प्लास सिटी में भी प्रयागराज ने पुरस्कार हासिल किए हैं। महापौर गणेश केसरवानी, नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा, स्वच्छता अभियान के प्रभारी अपर नगर आयुक्त दीपेंद्र यादव ने पुरस्कार प्राप्त किए।
गार्बेज फ्री श्रेणी में कुंभनगरी को फाइव स्टार
गार्बेज फ्री सिटी श्रेणी में भी प्रयागराज को फाइव स्टार मिले हैं। पिछले वर्ष इस श्रेणी में एक ही स्टार मिला था। बसवार में वर्षों से डंप कूड़ा के निस्तारण में नगर निगम को बड़ी सफलता मिली है। शहर में रोजाना निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए भी कई उपाय किए गए हैं। इसका नतीजा रहा कि प्रयागराज पांच सितारा शहरों की सूची में शामिल हुआ है।
वाटर प्लस सिटी घोषित
समारोह में प्रयागराज को वाटर प्लस सिटी भी घोषित किया गया। शहर के ज्यादातर नालों का पानी ट्रीटमेंट प्लांट से होकर ही नदियों में जाता है। इसके लिए महाकुंभ से पहले कई कार्य कराए गए। सीवर एवं नालों की सफाई के लिए सुपर शॉकर, रोबोट तकनीकी के उपयोग समेत कई अन्य कार्य कराए गए हैं। प्रमुख स्थलाें एवं आयोजनों में मोबाइल शौचालयों की भी संख्या बढ़ाई गई है। इन प्रयासों का नतीजा रहा कि प्रयागराज को वाटर प्लास सिटी के सर्टिफिकेट से नवाजा गया।
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