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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj: Instead of answers, notes were found buried in pages, now questions are being raised on the system.

प्रयागराज : जवाब की जगह पन्नों में दबे मिले नोट, अब सिस्टम से सवाल

Thu, 29 Oct 2026 05:22 PM IST
विनोद सिंह योगेश नारायण दीक्षित, प्रयागराज
योगेश नारायण दीक्षित, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 Oct 2026 05:22 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं में 100 से 500 रुपये तक के नोट रखने वाले विद्यार्थियों की मानसिकता को समझने के लिए पहल की। जिन छात्र-छात्राओं की कॉपी में सवालों के जवाब की जगह पन्नों में नोट दबे मिले, उन्हें बोर्ड के क्षेत्रीय मुख्यालयों में बुलाकर इसका कारण पूछा गया। जवाब ऐसे-ऐसे मिले जो केवल ज्यादा अंक को बच्चों की प्रतिभा का पैमाना मान लेने वाली पूरी प्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।

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Prayagraj: Instead of answers, notes were found buried in pages, now questions are being raised on the system.
उत्तर पुस्तिकाओं में नोट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश परीक्षार्थियों के मामले में संभवत: देश का सबसे बड़ा राज्य शिक्षा बोर्ड है। इसमें 10वीं और 12वीं के 51 लाख से ज्यादा विद्यार्थी प्रति वर्ष परीक्षा देते हैं। तकनीक का सहारा लेकर विवाद रहित और नकल रहित परीक्षा कराने के लिए बोर्ड ने तमाम प्रयास किए। लेकिन, उत्तर पुस्तिकाओं में 50 से 500 रुपये तक के नोट मिलने का सिलसिला साल-दर-साल बढ़ता जा रहा है। आखिर बच्चों की इस मानिसकता के पीछे का सही कारण क्या है और उत्तरपुस्तिकाओं से रुपये निकलने के पीछे का मनोविज्ञान क्या है?

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इसी को समझने के लिए यूपी बोर्ड के सचिव और प्रशासन के आला अफसरों ने सीधे उन विद्यार्थियों से बातचीत करने का फैसला किया, जिनकी कॉपी में नोट निकले थे। बोर्ड के नजदीकी क्षेत्रीय कार्यालयों में इन छात्र-छात्राओं को बुलाया गया। अधिकतर बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी पहुंचे। बोर्ड और विभाग के बड़े अफसरों के साथ जब बच्चे अकेले में मिले तो बड़ी रोचक जानकारियां सामने आईं।
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लखनऊ से प्रयागराज आई एक छात्रा ने बताया कि उसने किसी भी उत्तर पुस्तिका में नोट नहीं रखा। उसने तो पूछताछ करने वालों को चुनौती दी कि सीसीटीवी की रिकार्डिंग देख लीजिए। इसके बाद उसे समझाकर वापस भेज दिया गया। सबसे रोचक वाक्या तो तब आया जब प्रदेश के एक क्षेत्रीय कार्यालय में आए विद्यार्थी ने कॉपी में नोट निकलने के सवाल पर साथ आए कक्ष निरीक्षक (अध्यापक) की ओर देखना शुरू कर दिया। शिक्षा अधिकारियों ने जब बच्चे पर जवाब के लिए जोर दिया तो कक्ष निरीक्षक खुद ही जवाब देने लगे। इसके बाद अभिभावक ने भी शिक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाना शुरू कर दिया।

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अभिभावकों के प्रश्न ज्यादा बड़े हैं...


प्रयागराज के क्षेत्रीय केंद्र में 23 जिलों के 87 विद्यार्थी जवाब देने के लिए बुलाए गए थे। उनके साथ आए अभिभावकों ने परीक्षा केंद्रों में नोट पहुंचने और कॉपी बिना चेक किए जमा कराने को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो शिक्षक और कक्ष निरीक्षक विद्यार्थियों के दिमाग में यह बात बैठा रहे हैं कि ज्यादा नंबर पाने के लिए कॉपियों में नोट रखना चाहिए, उनकी पहचान की जानी चाहिए। उनका सवाल यह भी है कि जिन छात्रों को बुलाया गया है और कॉपी में नोट मिलने पर लिखित में जवाब लिया जा रहा है, उनके स्कूल-कॉलेजों में पढ़ाई के स्तर की भी पड़ताल होनी चाहिए। नकल रोकने के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे और कक्ष निरीक्षकों की सजग आंख परीक्षा कक्ष में नोटों की आमद नहीं रोक पा रही, तो इससे पूरी परीक्षा ही सवालों के घेरे में आ जा रही है।

सवाल पूरे सिस्टम से है...

वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में कॉपियों में नोट मिलने के करीब 400 मामले परीक्षकों ने पकड़े और ऊपर सूचित किया। न जाने कितने मामले ऐसे भी होंगे जो सूचित करने से रह गए होंगे। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि ज्यादा अंक पाने की होड़ ने परीक्षा प्रणाली को लचर किया है अथवा परीक्षा का उपहास बनाने के लिए यह खेल जान बूझकर किया जा रहा है। इस मसले को केवल पूछताछ और बच्चों की सजा तक सीमित नहीं रखना चाहिए। चूंकि अभिभावकों की ओर से सवाल पूरे सिस्टम पर उठाया जा रहा है, इसलिए इसके पीछे की पूरी साजिश को बेनकाब करने की जरूरत है।
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