प्रयागराज: पूर्व विधायक विक्रमाजीत मौर्य का हृदय गति रुकने से निधन, रसूलाबाद घाट पर पंचतत्व में हुए विलीन
फाफामऊ के विधायक रहे विक्रमाजीत मौर्य का राजनीतिक सफर कई दलों के साथ रहा। उन्होंने जनता दल से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। तब वह पहली बार 1989 में नवाबगंज विधानसभा (अब फाफामऊ) से विधायक बने। इसके बाद वह 1996 में इसी विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते।
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भाजपा से फाफामऊ विधायक रहे विक्रमाजीत मौर्य (63) का बृहस्पतिवार की देर रात निधन हो गया। दरभंगा कालोनी स्थित आवास पर उन्हें रात में दिल का दौरा पड़ा था। उसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। हालांकि तब तक वे अंतिम सांस ले चुके थे। शुक्रवार की दोपहर ही उनका अंतिम संस्कार रसूलाबाद घाट पर हुआ। उनके पुत्र कमल कृष्ण मौर्य ने उन्हें मुखाग्नि दी।
उधर उनके निधन की सूचना मिलने के बाद सुबह ही दरभंगा स्थित पूर्व विधायक के आवास पर भाजपा समेत तमाम दलों के पदाधिकारी आदि पहुंचने लगे। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी आदि ने टवीट कर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की। सांसद केशरी देवी पटेल ने उनके निधन को अपूर्णनीय क्षति बताया।
उधर उनकी अंतिम शव यात्रा में मेयर अभिलाषा गुप्ता नंदी, विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, प्रवीण पटेल, गुरु प्रसाद मौर्य, संदीप पटेल, एमएलसी डा. केपी श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीके सिंह, पूर्व विधायक दीपक पटेल, गणेश केसरवानी, अवधेश चंद्र गुप्ता, पदुम जायसवाल, मनोज कुशवाहा, पवन श्रीवास्तव, राजेश केेसरवानी आदि शामिल हुए।
कई दलों में रहे विक्रमाजीत मौर्य
फाफामऊ के विधायक रहे विक्रमाजीत मौर्य का राजनीतिक सफर कई दलों के साथ रहा। उन्होंने जनता दल से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। तब वह पहली बार 1989 में नवाबगंज विधानसभा (अब फाफामऊ) से विधायक बने। इसके बाद वह 1996 में इसी विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। 1997 में, वह नरेश अग्रवाल की नवगठित लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। तब वह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में ऊर्जा और उत्पाद शुल्क राज्य मंत्री भी बने।
तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के साथ अग्रवाल के मतभेद होने के बाद उन्होंने 2001 में अपना त्यागपत्र सौंप दिया । इसके बाद 2002 में वह सपा में शामिल हो गए। उन्होंने चुनाव तो लड़ा लेकिन अंसार अहमद से वह हार गए। विक्रमाजीत मौर्य वर्ष 2016 में भाजपा में शामिल हुए और फाफामऊ विधानसभा सीट से विधायक बने। इस वर्ष हुए चुनाव में उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन फिर भी उन्होंने भाजपा के प्रचार प्रसार किया।
पांच भाइयों में थे सबसे बड़े
विक्रमाजीत मौर्य अपने पांच भाइयों में सबसेे बड़े थे। उनका एक पुत्र एवं तीन पुत्रियां हैं। पिछले दिनों उनके यहां आयोजित वैवाहिक समारोह के बाद डिप्टी सीएम केशव मौर्य भी पहुंचे थे। इनसे छोटे भाई का निधन पिछले वर्ष हो गया था।