Prayagraj Flood: कई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, प्रयागराज में बढ़ा बाढ़ का खतरा
गंगा में छोड़ा गया पानी
हरिद्वार - 41247 क्यूसेक
नरौरा - 56137 क्यूसेक
कानपुर - 258921 क्यूसेक
रात आठ बजे नदियों का जल स्तर (खतरे का निशान 84.73 मी.)
गंगा नदी जल स्तर बढ़ोतरी
फाफामऊ 81.02 मी. स्थिर
छतनाग 80.15 मी. + 03 सेमी
यमुना नदी
नैनी 80.80 मी. -02 सेमी
विस्तार
गंगा और यमुना के जलस्तर में बुधवार को दिन में गिरावट दर्ज की गई। इससे निचले इलाकों में बसे लोगों ने थोड़ी राहत जरूर महसूस की लेकिन बाढ़ का खतरा टला नहीं है। मध्य प्रदेश से आने वाली नदियां उफान पर हैं। इससे यमुना नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी की संभावना है।
वहीं अलग-अलग स्थानों से गंगा नदी में भी साढ़े तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा के जल स्तर में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। इसका प्रभाव शाम को दिखने भी लगा था। रात आठ बजे जारी बुलेटिन के अनुसार गंगा के जल स्तर में छतनाग में प्रति घंटा तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ोतरी शुरू हो गई थी। वहीं यमुना के जल स्तर में कमी की रफ्तार भी धीमी हो गई थी।
सिंचाई विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार दिन में दोनों नदियों के जलस्तर में प्रति घंटा चार सेमी की कमी दर्ज की गई। हालांकि यह क्रम सिर्फ शाम तक चला। इससे निचले इलाकों में घुसा पानी वापस होने लगा लेकिन दोनों नदियों में पीछे अधिक मात्रा में पानी छोड़ा गया है। मध्य प्रदेश में लगातार बारिश जारी है। वहां की नदियों में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है, जो यमुना में मिल रही हैं।
केन, बेतवा, चंबल में तेज बहाव का असर यहां भी यमुना में बृहस्पतिवार को दिखने की बात कही जा रही है। सिंचाई बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार सिंह का कहना है कि बृहस्पतिवार शाम से यमुना में पानी बढ़ेगा। हालांकि इसका प्रभाव बुधवार शाम को ही दिखने लगा तथा जलस्तर में गिरावट मात्र दो सेमी प्रति घंटा रह गई थी।