प्रयागराजः सेना खाली करेगी अकबर का किला, तिथि तय
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1583 ईस्वी में बने अकबर के किले को आमजन के लिए खोले जाने की मांग बहुत पुरानी है। जब-तब इस मांग के समर्थन में आवाजें उठती रही हैं। इसी बीच रक्षा मंत्रालय ने किले में स्थित आयुध भंडार को छिवकी ले जाने का आदेश सेना मुख्यालय को दे दिया है। इस आदेश का आर्डिनेंस डिपो फोर्ट की किला मजदूर पंचायत विरोध कर रही है। शुक्रवार को पंचायत के अध्यक्ष अहमद सैयद के नेतृत्व में किला कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने सांसद रीता बहुगुणा जोशी से मुलाकात कर कार्यालयों की शिफ्टिंग किले के आसपास की ही जमीन पर कराने की गुहार लगाई है।
उधर, किला खाली कराने की तिथि तय होने के बाद आयुध भंडार और संबंधित विभागों के कार्यालयों को छिवकी स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए विभागवार सर्वे शुरू करा दिया गया है। पता चला है कि पहले सेना के दिल्ली स्थित हेडक्वार्टर से किले को 31 अगस्त तक खाली करने का आदेश आया था। इस पर जब किला प्रशासन ने कम समय होने का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए, तब अवधि बढ़ा दी गई। अब 11 महीने के भीतर यानी अप्रैल 2020 तक किले को खाली करने के लिए निर्देश दिया गया है। कमांडेंट कर्नल विवेक डब्बास ने इस संबंध में अधिकारियों- कर्मचारियों की बैठक बुलाकर आयुध भंडार की शिफ्टिंग संबंधी आदेश की जानकारी दी है।
संगम तट पर किले के निर्माण में लगे थे 45 वर्ष
संगम तट पर किले को बनाने पर 45 वर्ष लगे थे। सुरक्षा की दृष्ठि से महत्वपूर्ण इस किले को अकबर से बनवाया था, जिसमें 20 हजार मजदूर लगे थे। तब के इतिहासकार अबुल फजल के अनुसार इसकी नींव 1583 में रखी गई थी। किले में फारसी में लिखा शिलालेख है। उस पर भी 1583 में नींव रखे जाने का जिक्र है। हालांकि, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसका निर्माण 1574 से पहले शुरू हो गया था। 1773 में अंग्रेज किले में आए लेकिन दो वर्ष बाद ही उन्होंने इसे बंगाल के नवाब शुजाउद्दौला 0को इसे बेच दिया। फिर 1778 में एक संधि के बाद किला अंग्रेजों के पास आ गया। आजादी के बाद से किले पर भारत सरकार का अधिकार है।
0 तीस हजार वर्ग फुट में है बना
0 छह करोड़ 17 लाख 20 हजार 214 रुपये हुए थे खर्च