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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Prayagraj: Administration prevents AIKMS leaders from going to Lakhimpur Kheri, gives police a kiss and leaves for Tikunia

प्रयागराज : लखीमपुर खीरी जाने की तैयारी कर रहे किसान नेताओं को पुलिस ने घेरा, कई नेता चकमा देकर तिकुनिया रवाना

Mon, 11 Oct 2021 06:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 11 Oct 2021 06:00 PM IST
सार

किसान नेताओं ने एक दिन पहले पंचायत करके लखीमपुर खीरी जाने का फैसला किया था। इसकी भनक लगते ही प्रशासन ने उन्हें गांव में ही घेर लिया। बताया जाता है कि दर्जनभर किसान नेता पुलिस को चकमा देकर तिकुनिया के लिए रवाना हो गए हैं। 

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Prayagraj: Administration prevents AIKMS leaders from going to Lakhimpur Kheri, gives police a kiss and leaves for Tikunia
Prayagraj News : किसान नेताओं को लखीमपुर खीरी जाने से रोकती पुलिस। - फोटो : prayagraj

विस्तार

लखीमपुर खीरी जाने से रोकने के लिए प्रयागराज प्रशासन और पुलिस ने आज सुबह से कई अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा के नेताओं की आवाजाही पर रोक लगा दी। किसान नेता लखीमपुर खीरी जाने की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान किसान नेताओं की पुलिस से काफी नोकझोक हुई।
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तहसीलदार बारा हृदय राम तिवारी व घूरपुर एसओ राकेश कुमार राय नेताओं के साथ मौजूद हैं। अन्य गांवों में पुलिस नेताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें ट्रैक कर रही है। फिर भी लखीमपुर पहुंचने की कोशिश की जा रही है। रविवार को मजदूर किसान पंचायत के बाद बड़ी संख्या में किसान तिकुनिया जाने की तैयारी कर रहे थे। उनका कहना था कि वह हादसे में मारे गए किसानों को श्रद्धांजलि देने जा रहे हैं। 
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किसान नेताओं का आरोप है कि लवप्रीत सिंह, दलजीत सिंह, नछत्तर सिंह, गुरविंदर सिंह और रमन कश्यप की तीन अक्तूबर को तिकुनिया में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, अजय मिश्रा के तीन वाहनों से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। किसानों और कृषि श्रमिकों की आजीविका की कीमत पर कॉर्पोरेट विकास में मदद करने के लिए आरएसएस-बीजेपी की सरकार की प्रतिबद्धता के खिलाफ इस नरसंहार ने लोगों मे नाराजगी की एक नयी चिंगारी जला दी है। 
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एआईकेएमएस के महासचिव डॉ. आशीष मिताली किसानों, कार्यकर्ताओं और नेताओं की इस अवैध हिरासत की कडी निंदा की है। यह भाजपा सरकार के अलोकतांत्रिक और जनविरोधी चरित्र को उजागर करता है। वह किसानों को शहीदों को श्रद्धांजलि देने से रोक रहा है। यह दर्शाता है कि 'भक्तों' की यह सरकार देश के अन्नदाताओं के प्रति कितनी बेपरवाह है।

बताया जाता है कि रविवार को लालापुर के ओढगी तरहार  गांव में हुई किसान पंचायत में निर्णय लिया गया था कि घूरपुर क्षेत्र से किसान अखिल भारतीय किसान सभा की अगुवाई  में लखीमपुर खीरी में शहीद किसानों को श्रद्धांजलि के लिए आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने जाएंगे।

सोमवार को सुबह बीकर गांव में 15 किसान संगठन के सचिव राजकुमार पथिक की अगुवाई में लखीमपुर खीरी जाने की तैयारी कर रहे थे। उसी समय लगभग साढ़े आठ बजे तहसीलदार बारा हृदयराम तिवारी, थानाध्यक्ष घूरपुर राकेश कुमार राय गांव पहुंचे। उन्होंने बातचीत के बहाने किसानों को रोके रखा।


तहसीलदार का कहना था कि आप लोग वहां नहीं जा सकते। आप चलकर थाने में बैठें. लेकिन संगठन के लोग लखीमपुर खीरी जाने के लिए अड़े रहे। दोपहर एक बजे के बाद तहसीलदार बारा और पुलिस फोर्स वापस लौट गई। बताया जाता है कि तमाम पाबंदियों के बावूजद दर्जनभर किसान नेता पुलिस को चकमा देकर लखीमपुर खीरी के लिए रवाना हो गए हैं। 
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